सड़कों और राजमार्ग मंत्री नितिन गाडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग योजना पर आरोपों को झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने बताया कि उनके पुत्रों का इस क्षेत्र में बहुत छोटा हिस्सेदारी है और यह कार्यक्रम कई वर्षों से जारी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गाडकरी ने इथेनॉल योजना में व्यक्तिगत लाभ का इनकार किया
- उनके पुत्रों की कंपनी का इथेनॉल में <0.5% से कम हिस्सा
- इथेनॉल ब्लेंडिंग कई सरकारों के तहत चल रहा है, नयी नहीं
नई दिल्ली: सड़कों और राजमार्ग मंत्री नितिन गाडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर उठाए गए आरोपों का कड़ा खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह पहल वैजपेयी सरकार से शुरू हुई थी और यू.पी.ए. सरकार द्वारा भी समर्थन मिली थी। इस बीच, विपक्षी दलों और कुछ सोशल‑मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा उनके परिवार के व्यवसाय में हितों के टकराव की बात उभारी गई थी, जिसे उन्होंने “राजनीतिक रूप से प्रेरित” कहा।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
इथेनॉल को ईंधन में मिलाने का विचार 2000 के दशक की शुरुआत में भारत में आया, जब देश ने आयात‑निर्भरता कम करने और वायु प्रदूषण घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों की तलाश शुरू की। 2005 में तब के तेल मंत्री मणि शंकर अय्यर ने संसद में इस नीति को दोहराया, और तब से 10%‑20% के मिश्रण लक्ष्य को क्रमशः बढ़ाया गया। गाडकरी ने इस दिशा में कई नई पहलों को आगे बढ़ाया, जिसमें मक्का, बांस और धान के अवशेषों से इथेनॉल उत्पादन शामिल है।
परिवारिक व्यवसाय का आकार
विवाद का प्रमुख बिंदु था कि गाडकरी के दो पुत्रों की कंपनी इथेनॉल उत्पादन में शामिल है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी का इस क्षेत्र में 0.5% से कम हिस्सा है, जबकि कुल उद्योग का राजस्व हजारों करोड़ रुपये है। साथ ही, कंपनी पर 1,600 करोड़ रुपये का ऋण है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह अभी लाभदायक नहीं है। उन्होंने कहा कि मूल्य निर्धारण और खरीद‑बिक्री की प्रक्रिया पूरी तरह से कैबिनेट द्वारा नियंत्रित होती है, न कि किसी निजी उद्यम द्वारा।
विरोधी आवाज़ें और तथ्य‑आधारित प्रतिक्रिया
इथेनॉल‑ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) को लेकर कई वाहन मालिकों ने माइलेज में गिरावट और इंजन क्षति की चिंता जताई। गाडकरी ने कहा कि सभी E10‑संगत वाहनों को E20 चलाने में कोई तकनीकी समस्या नहीं है, और मारुति सुजुकी समेत प्रमुख ऑटो निर्माताओं ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हाईवे पर उच्च गति से चलाने पर कैलोरी मूल्य में अंतर के कारण थोड़ा माइलेज घट सकता है, लेकिन यह राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव नहीं डालता।
भविष्य की दिशा
गाडकरी ने इथेनॉल के साथ‑साथ मेथनॉल, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को भी प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि विविध वैकल्पिक ईंधन स्रोतों से न केवल वायु गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि भारत की तेल आयात पर निर्भरता भी घटेगी। इस रणनीति को लागू करने के लिए दीर्घकालिक नीति‑समर्थन, तकनीकी नवाचार और किसान‑उन्मुख प्रोत्साहन आवश्यक है।
संक्षेप में, नितिन गाडकरी ने व्यक्तिगत हित के आरोपों को खारिज करते हुए इथेनॉल योजना की ऐतिहासिक वैधता और राष्ट्रीय महत्व को दोहराया। उनका संदेश स्पष्ट है: “यदि आप E20 नहीं चाहते तो 100% पेट्रोल ले सकते हैं, पर कीमत अधिक होगी।”