मायसूर‑नंजांगुड़ हाईवे पर बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों ने पुलिस की कथित अत्याचार के विरोध में अवरोधन किया। राज्य के शुगरकेन उगाने वाले संघ की अध्यक्ष के निर्देशों पर यह प्रदर्शन हुआ, जिसमें कई किसान और महिलाएँ घायल हुईं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों ने हाईवे अवरोधन किया
- पुलिस ने लाठी चार्ज कर कई किसानों और महिलाओं को घायल किया
- किसानों ने सरकार से भूमि अधिग्रहण अधिसूचना वापस लेने की मांग की
कर्नाटक के मायसूर जिले में बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों का विरोध तीव्र हो गया। राज्य शुगरकेन उगाने वाले संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शान्ताकुमार के निर्देश पर मायसूर तहसील इकाई ने कुवेमपू पार्क में एक आपात बैठक बुलाई, जहाँ किसानों ने पुलिस द्वारा उपयोग किए गए बल के खिलाफ कड़े शब्दों में निंदा की।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना, जो उद्योगिक और आवासीय विकास के नाम पर प्रस्तावित है, में कई हज़ार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि शामिल है। ये भूमि पीढ़ियों से शुगरकेन और अन्य फसलों की खेती के लिए उपयोग की जा रही है, साथ ही कोकोनट और आम के पेड़, तथा बेंगलुरु में दैनिक लाखों लीटर दूध की आपूर्ति का स्रोत भी है। पिछले महीनों में राज्य सरकार ने इस भूमि को अधिग्रहित करने की अंतिम अधिसूचना जारी करने की तैयारी की, जिससे स्थानीय किसानों में असंतोष बढ़ा।
अवरोधन की घटना
15 जुलाई को, किसानों ने मायसूर‑नंजांगुड़ हाईवे के बैंडिपाल्या निकट एक बड़े पैमाने पर अवरोधन किया। वे सरकारी अधिकारियों की लैंड सर्वे करने की कोशिश को रोकते हुए, लाठी चार्ज के बहाने पुलिस के बल प्रयोग की निंदा करते रहे। कई वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ और बच्चे भी इस लाठी चार्ज में शामिल हो गए, जिससे कई घायल हो कर अस्पताल में भर्ती हुए। पुलिस ने कई किसानों को जबरन हिरासत में भी ले लिया, और उन पर मामला दर्ज किया।
सरकार और पुलिस का जवाब
बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना के पक्ष में राज्य सरकार ने कहा कि यह विकास परियोजना क्षेत्रीय आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक है। हालांकि, किसानों ने कहा कि कोई परामर्श या सहमति प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जिससे उनकी आजीविका और पारिवारिक धरोहर खतरे में पड़ गई। पुलिस के द्वारा लाठी चार्ज को “प्रदर्शन को बिखेरने” के बहाने इस्तेमाल करने की आलोचना कई सामाजिक संगठनों ने की, और उन्होंने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
भविष्य की दिशा
किसानों ने सरकार से तुरंत अधिग्रहण अधिसूचना वापस लेने, सभी गिरफ्तार किसानों को रिहा करने, और इस मुद्दे पर पारदर्शी सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने की माँग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ज़ोरजबरदस्ती ज़मीनी अधिग्रहण जारी रखती है, तो राज्य भर में आंदोलन तेज़ हो सकता है। इस बीच, पर्यावरणीय और कृषि विशेषज्ञों ने इस प्रकार के बड़े पैमाने पर भूमि परिवर्तन के सामाजिक‑आर्थिक प्रभावों पर व्यापक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया है।
यह संघर्ष कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण, किसान अधिकार और विकास नीति के बीच के जटिल संतुलन को उजागर करता है, और आगे के राजनीतिक और सामाजिक विकास की दिशा निर्धारित करेगा।