तेलंगाना के टीडीपी राज्य अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राजू ने यश राजीव मोहन रेड्डी की मछुआरों की मृत्यु पर प्रतिक्रिया को राजनीतिक दोहरे मानदंड बताया। उन्होंने पिछले पाँच सालों की समुद्री कल्याण नीतियों और वर्तमान सरकार की त्वरित राहत कार्यों की तुलना की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पल्ला ने जगर के बयान पर तीखा विरोध किया
  • नवीनतम नौका दुर्घटना में कई मछुआरों की जान गई
  • टीडीपी ने सरकारी राहत और पूर्व सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाए

विसाखापत्तनम की किनारे पर हुई नौका डुबकी में कई मछुआरों की मौत और एक जीवित बचे के बाद, तेलंगाना के तृतीय दल (टेलीगु डेसाम) के राज्य अध्यक्ष एवं गजुवाका विधायक पल्ला श्रीनिवास राजू ने इस घटना पर केंद्र सरकार के प्रमुख यश राजीव मोहन रेड्डी (जगर) के बयान को "राजनीतिक दोहरे मानदंड" कहा। यह टिप्पणी 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित हुई, जब जगर ने पीड़ित परिवारों से मिलने की कोशिश की थी।

पृष्ठभूमि और घटना का विवरण

विसाखापत्तनम के समुद्र तट के पास एक छोटी नाव अचानक उल्टी, जिससे 10 से अधिक मछुआरों की मौत हुई और एक व्यक्ति बच निकला। घटना के तुरंत बाद, राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भारतीय कोस्ट गार्ड, भारतीय नौसेना और राज्य प्रशासन को त्वरित बचाव कार्रवाई के लिए तैनात किया। 72 घंटों के भीतर, राष्ट्रीय आपातकालीन निधि (एनडीए) ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता दी, जिसमें 5 लाख मत्स्य विभाग से और 5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से आए।

पल्ला का आरोप और प्रश्न

पल्ला ने जगर के बयान को निंदनीय कहा, यह कहते हुए कि जगर को समुद्री समुदाय के दर्द को देखे बिना अपने पाँच साल के कार्यकाल में समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को "व्यवस्थित रूप से नष्ट" करने का दायित्व लेना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि यश राजीव मोहन रेड्डी के दल ने घटना की रात ही पीड़ितों की फोटो, आधार कार्ड और विस्तृत जानकारी कैसे हासिल की, जबकि आधिकारिक चैनलों को अभी तक सूचित नहीं किया गया था।

पूर्व सरकार की नीतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण

पल्ला ने यह उजागर किया कि यश राजीव मोहन रेड्डी की पिछली सरकार ने समुद्री दुर्घटनाओं के लिए 10 लाख रुपये की मुआवजा योजना की घोषणा की थी, परन्तु 116 में से 52 दावों को बजट की कमी के बहाने कई सालों तक टाला गया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि यश की सरकार ने समुद्री समुदाय को कोई नई जाल या उपकरण नहीं दिया, बल्कि जी.ओ. 217 जैसी नियमावली का उपयोग करके स्थानीय सहकारी समितियों के अधिकार छीनने और उन्हें पार्टी के अनुयायियों को ऑनलाइन नीलामियों के माध्यम से किराए पर देने की नीति अपनाई। इस नीतियों ने हजारों मछुआरों को अपने गांवों में जबरन प्रवास और श्रम कार्य करने के लिए मजबूर किया।

भविष्य की दिशा और राजनीतिक प्रभाव

पल्ला ने जगर को स्पष्ट रूप से चुनौती दी कि वह अपने कार्यकाल में वितरित किए गए मुआवजे की पारदर्शी रिपोर्ट पेश करे। वह इस बात को भी उजागर करना चाहते हैं कि मृतकों के परिवारों को मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिया गया, जिससे वे बीमा दावा नहीं कर सके। इस प्रकार की आलोचनाएँ तेलंगाना की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती हैं, जहाँ टीडीपी और वार्षिक वाणिज्यिक पक्षी (वाईएसआरसीपी) दोनों ही समुद्री समुदाय के कल्याण को अपने चुनावी एजेंडा में प्रमुख बनाना चाहते हैं।