दिल्ली सरकार ने एक नई ‘स्प्रे, इंजेक्शन, पैचिंग’ तकनीक लागू की है जिससे 5 मिनट के भीतर गड्ढे बंद किए जा सकते हैं। एक मशीन और छोटा दल 100‑150 गड्ढे प्रतिदिन ठीक कर सकते हैं, जिससे ट्रैफिक में न्यूनतम व्यवधान रहता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • गड्ढे 5 मिनट के भीतर मरम्मत किए जा सकते हैं।
  • एक मशीन, छोटा दल 100‑150 गड्ढे प्रतिदिन ठीक कर सकता है।
  • मॉनसून में भी काम करने वाली पर्यावरण‑मित्र तकनीक।
  • उच्च‑वॉल्यूम, दीर्घकालिक समाधान के लिए बिटुमेन इमल्शन का उपयोग।
  • जम्मू‑कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि कई राज्यों में पहले से अपनाई गई।

दिल्ली के पब्लिक वर्क्स विभाग (PWD) ने बुधवार को नई ‘स्प्रे, इंजेक्शन, पैचिंग’ तकनीक के परीक्षण को औपचारिक रूप से शुरू किया। यह पूरी तरह से यांत्रिक, एकल‑मशीन समाधान गड्ढे, किनारे के टूट‑फूट, यूटिलिटी कट और बड़ी दरारों को पाँच मिनट से कम समय में स्थायी रूप से भरता है।

प्रौद्योगिकी का विवरण

प्रक्रिया में पहले उच्च गति वाली हवा से गड्ढे की सतह को साफ किया जाता है, फिर बिटुमेन इमल्शन की बाइंडिंग लेयर लगाई जाती है और अंत में इमल्शन‑कोटेड एग्रीगेट को उच्च दबाव से इंजेक्ट किया जाता है। इंजेक्शन की गति स्वयं संपीड़न का काम करती है, जिससे रोलर की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह विधि सभी मौसमों में, विशेषकर बरसात के दौरान, प्रभावी रहती है।

ऑपरेशनल दक्षता

एक मोबाइल, स्व-निहित मशीन और दो‑तीन कर्मियों की टीम प्रतिदिन 100‑150 गड्ढे ठीक कर सकती है, जिससे दिल्ली के विस्तृत सड़कीय नेटवर्क को तेज़ी से कवरेज मिल जाता है। सड़क को तुरंत उपयोग के लिए खोल दिया जाता है, जिससे ट्रैफ़िक जाम और यात्रियों को असुविधा कम होती है।

पर्यावरणीय पहलू

यह ठंडी‑आधारित प्रक्रिया हॉट‑मिक्स प्लांट की जरूरत नहीं रखती, जिससे ईंधन की खपत और उत्सर्जन घटते हैं। केवल आवश्यक मात्रा में सामग्री का मिश्रण और स्प्रे किया जाता है, जिससे शून्य सामग्री बर्बादी सुनिश्चित होती है।

राज्य‑स्तरीय अपनापन

जम्मू‑कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे कई राज्य इस तकनीक को तेज, टिकाऊ और सतत सड़कीय रख‑रखाव के लिए अपना चुके हैं। दिल्ली में इसको विस्तृत रूप से लागू करने से राष्ट्रीय स्तर पर समान समाधान को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य महानगरों में दोहराया जाए तो भारत की सड़कीय बुनियादी संरचना में दीर्घकालिक सुधार संभव है, साथ ही सार्वजनिक खर्च में भी उल्लेखनीय बचत हो सकती है।