बिहार सरकार ने 75 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर की दरवाज़े पर ही भूमि‑पंजीकरण सुविधा शुरू की। ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ योजना से मध्यस्थों के शोषण से राहत मिलनी की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 75 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर‑पर रजिस्ट्रेशन सेवा शुरू
- मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट में लैपटॉप, बायोमेट्रिक स्कैनर और डिजिटल सिग्नेचर पैड शामिल
- ब्रोकरों की ग़ैरक़ानूनी फीस को खत्म कर राजस्व में सुधार की संभावना
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 जुलाई को ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ पहल के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर‑पर रियल एस्टेट पंजीकरण सेवा का शुभारंभ किया। यह कदम राज्य की जमीनी रजिस्ट्री प्रणाली को आधुनिक बनाने और बुजुर्ग नागरिकों पर पड़े बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सेवा का कार्य‑प्रणाली
सेवा हेतु इच्छुक नागरिक को आधिकारिक ई‑रजिस्ट्री पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। आयु सत्यापित होने के बाद, एक मोबाइल रजिस्ट्री यूनिट—जिसमें इंटरनेट‑सक्षम लैपटॉप, बायोमेट्रिक स्कैनर, वेबकैम और डिजिटल सिग्नेचर पैड शामिल हैं—निवास स्थान पर भेजी जाती है। यूनिट दस्तावेज़ों की जाँच, बायोमेट्रिक प्रामाणिकता तथा तुरंत डिजिटल डीड जारी करती है, जिसे एसएमएस के माध्यम से पीडीएफ स्वरूप में प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान में यह सेवा पटना, हाजीपुर सहित 10 रजिस्ट्री कार्यालयों में सक्रिय है और आने वाले महीनों में राज्य भर में क्रमिक रूप से लागू होगी।
ब्रोकरों के शोषण को समाप्त करने की दिशा
पिछले दो दशकों में मध्यस्थों ने कागज़ी जटिलताएँ और आधिकारिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर बुजुर्गों से महँगे ‘सुविधा शुल्क’ व रिश्वत ली है। कई बार दस्तावेज़ों की गड़बड़ी, फाइलों का खो जाना या गलत मूल्यांकन के माध्यम से स्टैम्प ड्यूटी से बचाव किया जाता रहा। नई ई‑रजिस्ट्री प्रणाली इन शारीरिक टचपॉइंट्स को हटाकर ब्रोकरों की शक्ति को खत्म करती है।
प्रौद्योगिकीय पहल और राजस्व प्रभाव
बिहार ने 38 जिलों में 137 पूरी तरह डिजिटलाइज्ड सब‑रजिस्ट्री ऑफिस (एसआरओ) स्थापित किए हैं, सभी राज्य की भूमि‑रिकॉर्ड डेटाबेस से जुड़ी हुईं हैं। स्वचालित शुल्क गणना, ई‑चालान और ई‑स्टैंप के प्रयोग से अतिरिक्त “छिपी हुई प्रशासनिक लागत” की संभावना समाप्त हो गई है। सरकार ने इस डिजिटल परिवर्तन से वार्षिक राजस्व लक्ष्य ₹8,250 करोड़ निर्धारित किया है, जिससे भ्रष्टाचार में कमी और कर संग्रह में सुधार की उम्मीद है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगी, बल्कि अन्य वर्गों के लिए भी समान मॉडल लागू करने की नींव रखेगी। यदि सफल रहा, तो यह भारत के अन्य राज्यों में भूमि‑पंजीकरण में तकनीकी‑सक्षम, मध्यस्थ‑मुक्त समाधान के रूप में एक मानक स्थापित कर सकता है।