भारत की चुनाव आयोग ने आंध्र प्रदेश और हरियाणा में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के समय‑सारिणी को 10 दिन बढ़ा दिया है। अब मतदाता फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई से 24 जुलाई तक बढ़ गई, जबकि ड्राफ्ट रोल 31 जुलाई को प्रकाशित होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- आंध्र प्रदेश और हरियाणा में SIR की समाप्ति तिथि 10 दिन बढ़ी
- मतदाता फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 24 जुलाई, ड्राफ्ट रोल 31 जुलाई
- अंतिम रोल 3 अक्टूबर को प्रकाशित होगा
भारत की चुनाव आयोग ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश और हरियाणा में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समय‑सारिणी में 10‑दिन का विस्तार किया। यह निर्णय 14 जुलाई को घोषित की गई तीसरी चरण की SIR के बाद आया, जिसमें कुल 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
SIR का उद्देश्य चुनावी रोल को साफ‑सुथरा बनाना, डुप्लिकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को हटाना तथा नई प्रविष्टियों को शामिल करना है। इस प्रक्रिया को भारत में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू किया गया था, जिससे आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों में विश्वसनीय मतदाता सूची सुनिश्चित हो सके। मई 14 को घोषित तीसरे चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ को 5 जून से enumeration (सूचीकरण) शुरू हुआ।
वर्तमान स्थिति
हरियाणा में लगभग 36 लाख मतदाता अभी तक साफ‑सुथरे नहीं हुए हैं, जबकि 2.88 लाख मतदाता के enumeration फॉर्म अभी भी लंबित हैं। कुल 33 लाख मतदाता ASDD (Absent, Shifted, Duplicate or Dead) श्रेणी में रखे गए हैं। हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी ए. श्रीनिवास ने बताया कि 6 बजे तक 1.70 करोड़ (82.38%) फॉर्म प्राप्त हुए हैं और सभी को डिजिटल रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “हम चुनाव आयोग से अनुरोध करते हैं कि कोई भी पात्र मतदाता पीछे न छूटे।”
आंध्र प्रदेश में भी 40 लाख (9%) फॉर्म अभी तक एकत्र नहीं हुए हैं, जिसके कारण राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी विवेक यादव ने समान विस्तार की मांग की।
प्रभाव और आगे की राह
नए समय‑सारिणी के अनुसार, बूथ‑लेवल अधिकारी (BLO) 24 जुलाई तक घर‑घर जाकर फॉर्म इकट्ठा करेंगे। ड्राफ्ट रोल 31 जुलाई को प्रकाशित होगा, जिसके बाद 31 जुलाई से 30 अगस्त तक दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया चलेगी। सभी नोटिस 28 सितंबर तक निपटाए जाएंगे, और अंतिम रोल 3 अक्टूबर को जारी होगा। यह विस्तारित समय‑सीमा मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाने और संभावित कानूनी चुनौतियों को कम करने में मदद करेगी।
राजनीतिक महत्व
आधुनिक भारतीय लोकतंत्र में सटीक मतदाता सूची चुनावी परिणामों की वैधता का मूल आधार है। हरियाणा और आंध्र प्रदेश दोनों में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राज्य‑स्तरीय चुनावों की तैयारी चल रही है, जहाँ प्रत्येक वोट का महत्व बढ़ा हुआ है। इस विस्तार से प्रमुख राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति समायोजित करने का समय मिलेगा, जबकि मतदाता अधिकार संगठनों को भी यह आशा होगी कि शुद्ध सूची के कारण छूटे हुए वोटरों की संख्या घटेगी।