बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एधॉक अनुबंध समाप्त होने के बाद महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ नहीं मिल सकता। यह फैसला श्रम‑कानून के दायरे में नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध की मौजूदगी को आधार बनाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एधॉक अनुबंध समाप्त होने पर मातृत्व लाभ नहीं दिया जाएगा।
- मातृत्व लाभ के लिए नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध का अस्तित्व आवश्यक है।
- स्थायी एवं अनुबंधित कर्मचारियों के अधिकारों में अंतर स्पष्ट हुआ।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें यह कहा गया कि एधॉक (अस्थायी) अनुबंध समाप्त होने के बाद महिला शिक्षक को मातृत्व लाभ का अधिकार नहीं है। यह निर्णय दो न्यायाधीशों, जस्टिस गिरीश कुर्लार्नी और जस्टिस आरती साठे, की पीठ पर सुनाया गया, जो एक सहायक प्रोफेसर द्वारा दायर शिकायत पर आधारित था।
कानूनी पृष्ठभूमि
भारत का मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 उन महिलाओं को अवकाश और आर्थिक सहायता प्रदान करता है जो नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध के तहत कार्यरत हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार केवल तब लागू होता है जब रोजगार संबंध कानूनी रूप से जारी रहता है। यदि अनुबंध समाप्त हो गया हो, तो यह अधिकार समाप्त हो जाता है।
केस का विवरण
विवादित महिला को जून 2023 से अप्रैल 2024 तक एक एधॉक सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। मार्च 2024 में उसने 14 जून से मातृत्व अवकाश की मांग की, जबकि उसकी अनुमानित प्रसव तिथि 18 जुलाई 2024 थी। कॉलेज ने कहा कि अनुबंध समाप्त होने के बाद वह लाभ का हकदार नहीं है। उसने अक्टूबर 2024 में यह दावा किया कि उसे अनुचित रूप से निकाला गया और मातृत्व लाभ नहीं दिया गया। उच्च न्यायालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अनुबंध समाप्त होने के बाद नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध नहीं रहा, इसलिए लाभ नहीं दिया जा सकता।
संतुलन एवं प्रभाव
यह निर्णय अस्थायी कर्मचारियों के अधिकारों को पुनः परिभाषित करता है। कई निजी और सरकारी संस्थानों में एधॉक अनुबंध आम हैं, और इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि इन अनुबंधों के समाप्त होते ही मातृत्व लाभ नहीं मिलेगा, जब तक कि नई नियुक्ति न हो। इससे कर्मचारियों को अनुबंध नवीनीकरण के समय स्पष्टता मिलेगी, पर साथ ही अधिक स्थायी रोजगार की मांग भी बढ़ेगी।
भविष्य की दिशा
कानून निर्माताओं को अब इस अंतर को पाटने के लिए संशोधन पर विचार करना पड़ सकता है, जिससे एधॉक कर्मचारियों को भी मातृत्व के दौरान सुरक्षा मिल सके। उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को अनुबंध की शर्तों में स्पष्टता जोड़नी चाहिए, ताकि भविष्य में समान विवादों से बचा जा सके।