आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नंदन चंद्रबाबू नायडू ने व्यापार नियमों को पुनः लिखने और प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासन को तेज़ बनाने के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया। यह कदम नागरिक सेवाओं की दक्षता और विकास परियोजनाओं की समयबद्धता को बढ़ावा देगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • व्यापार नियमों का पुनर्लेखन एवं तकनीकी‑आधारित प्रशासन
  • जन शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए भीड़‑स्रोत तंत्र
  • पर्यटन‑आधारित मंदिर विकास एवं कृषि में उर्वरक उपलब्धता

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नंदन चंद्रबाबू नायडू ने 15 जुलाई को राजकीय सचिवालय में आयोजित रियल‑टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के समन्वय में एक विस्तृत समीक्षा बैठक के दौरान व्यापार नियमों में व्यापक बदलाव करने का निर्देश दिया। यह पहल राज्य के ब्यूरेक्रेटिक जाम को तोड़कर, प्रौद्योगिकी‑संचालित प्रशासन को तेज़ करने और विकास परियोजनाओं की फाइल क्लियरेंस में देरी को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई है।

पिछला इतिहास और डिजिटल परिवर्तन की दिशा

नायडू सरकार ने पिछले दो दशकों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है, जैसे कि एपी इ‑गवर्नेंस पोर्टल और RTGS प्लेटफ़ॉर्म, जो वास्तविक‑समय में नागरिकों की शिकायतें और सेवा अनुरोधों को ट्रैक करता है। इस नई पहल से उन प्रक्रियाओं को पुनः डिज़ाइन किया जाएगा, जो अक्सर अनावश्यक कागजी कार्यवाही और अनुमोदन स्तरों के कारण धीमी पड़ती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तकनीकी समाधान नीतियों में एकीकृत नहीं होते, तब तक ब्यूरेक्रेसी का बोझ बना रहेगा।

जन शिकायतों के समाधान में भीड़‑स्रोत का उपयोग

मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को भीड़‑स्रोत (crowd‑sourcing) तंत्र अपनाने का निर्देश दिया, जिससे सार्वजनिक शिकायतों को डिजिटल रूप में एकत्र किया जा सके और प्रत्येक शिकायतकर्ता को उचित उत्तर सुनिश्चित किया जा सके। यह न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि शिकायतों के प्रवाह में वृद्धि या गिरावट को वास्तविक‑समय में मापने की क्षमता भी प्रदान करेगा। इस मानव‑केन्द्रित दृष्टिकोण से प्रशासनिक संवेदनशीलता में सुधार की उम्मीद है।

धार्मिक, कृषि और परिवहन क्षेत्रों में विशिष्ट निर्देश

बैठक में एपी के प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन को आर्थिक एवं पर्यटन केंद्रों में बदलने की योजना पर भी चर्चा हुई। नायडू ने 21 प्रमुख मंदिरों को उचित योजना के तहत विकासित करने का आग्रह किया, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और आय में वृद्धि हो सके। कृषि विभाग को उर्वरक उपलब्धता के बारे में किसानों को रिथु सेवा केंद्रों के माध्यम से जागरूक करने और दुरुपयोग को रोकने का निर्देश मिला। साथ ही, एपीएसआरटीसी को बस स्टेशनों की सुविधाओं में सुधार और समय‑सारिणी के पालन पर बल दिया गया।

भूमि प्रशासन और भविष्य की संभावनाएँ

भूमि रिकॉर्ड में 27 लाख पट्टाधारक पासबुक पहले ही वितरित किए जा चुके हैं, जबकि शेष 72 लाख पासबुक जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। नायडू ने शेट्टिपल्लि भूमि विवाद के समाधान को उजागर किया, जिससे राज्य को लगभग ₹900 करोड़ की भूमि पुनः प्राप्ति हुई। उन्होंने अधिकारियों को समान अवसरों की पहचान कर राज्य भर में ऐसी ही आर्थिक लाभ उठाने की चेतावनी दी।

समग्र रूप से, यह व्यापक सुधार योजना आंध्र प्रदेश को भारत के सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे राज्यों में से एक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ तकनीक और कुशल प्रशासन एक साथ काम कर रहे हैं।