पश्चिम बंगाल के मालदा में सोशल मीडिया के जरिए K-pop स्टार बनने का सपना दिखाकर दो छठी कक्षा की छात्राओं को बहलाया गया। पुलिस ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने से पहले सुरक्षित बचा लिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मालदा की दो छठी कक्षा की छात्राएं K-pop और मॉडलिंग के झूठे वादे के कारण घर से भागी थीं।
- सोशल मीडिया (Pinterest) के जरिए एक संदिग्ध 'दिघी सरकार' ने उन्हें एक साल तक गुमराह किया।
- लड़कियों को पहले भूटान और फिर दक्षिण कोरिया ले जाने का झांसा दिया गया था।
- पुलिस और एनजीओ ने उन्हें सिलीगुड़ी के पास एक बस से सुरक्षित बरामद किया।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया के मायाजाल में फंसकर दो नाबालिग लड़कियां अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के शिकार होने से बाल-बाल बच गईं। छठी कक्षा में पढ़ने वाली इन दोनों बच्चियों को दक्षिण कोरियाई मनोरंजन उद्योग में K-pop आइडल और मॉडल बनने का सुनहरा सपना दिखाकर बहलाया गया था।
सोशल मीडिया के जरिए मनोवैज्ञानिक जाल
जांच में पता चला है कि आरोपी ने 'दिघी सरकार' नामक एक फर्जी पहचान का उपयोग करके पिछले एक साल से लड़कियों का विश्वास जीता था। अपराधियों ने Pinterest जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग किया और उन्हें 'Demons' नामक एक गुप्त ऑनलाइन ग्रुप में शामिल किया। इस ग्रुप के माध्यम से लड़कियों को कोरियाई भाषा और संस्कृति सीखने के लिए प्रेरित किया गया, जो स्पष्ट रूप से उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करने की एक सोची-समझी साजिश थी।
तस्करी की साजिश का खुलासा
अपराधियों ने लड़कियों को विश्वास दिलाया कि वे पहले भूटान जाएंगी और वहां से उन्हें दक्षिण कोरिया ले जाया जाएगा। जब लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली, तो पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाई। पुलिस को जानकारी मिली कि दोनों लड़कियां सिलीगुड़ी की ओर जा रही हैं। नौकाघाट क्षेत्र में एक विशेष तलाशी अभियान चलाकर पुलिस ने उन्हें एक बस से सुरक्षित बरामद कर लिया, इससे पहले कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब पहुंच पातीं।
बड़ा नेटवर्क होने की आशंका
पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़े संगठित मानव तस्करी रैकेट का हिस्सा है। डिजिटल साक्ष्यों और ऑनलाइन ग्रुप्स की जांच की जा रही है ताकि उन मास्टरमाइंड्स तक पहुंचा जा सके जो सोशल मीडिया के माध्यम से मासूम बच्चों को निशाना बना रहे हैं। इस मामले में एक स्थानीय एनजीओ ने भी पुलिस की सहायता की है।