भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को 19 अगस्त तक दारा सिंह की माफी की याचिका पर निर्णय लेने का समय दिया है। 2000 में दंडित दारा सिंह, 26 साल से अधिक जेल में रहे, अब अपने अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहाई की आशा रखता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की माफी के निर्णय के लिए 19 अगस्त को अंतिम तिथि निर्धारित की।
- ओडिशा की सजा समीक्षा बोर्ड ने दारा की अच्छी व्यवहार के कारण माफी को सकारात्मक रूप से देखा है।
- जेल और जिला प्रशासन से अद्यतन जानकारी की आवश्यकता के कारण अंतिम फैसला अभी लंबित है।
दारा सिंह, 62 वर्ष, को 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्रेहम स्टेन्स और उनके दो छोटे पुत्रों की हत्या के बाद 2000 में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। उसके बाद 2003 में मृत्युदंड को जीवन कारावास में बदला गया और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस जीवन कारावास को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
बुधवार को सुनवाई में, न्यायमुक्ति के दो न्यायाधीश, मनोज मिस्रा और विजय बिश्नोई, ने ओडिशा सरकार को 19 अगस्त तक दारा सिंह की माफी की याचिका पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में राज्य को सभी आवश्यक दस्तावेज़ और अद्यतन जानकारी प्रदान करनी होगी, ताकि समीक्षा बोर्ड अपना निर्णय दे सके।
ओडिशा की सजा समीक्षा बोर्ड की प्रवृत्ति
राज्य स्रोतों के अनुसार, बोर्ड ने दारा सिंह के मामले को “सकारात्मक” रूप से देखा है, क्योंकि वह 26 साल से अधिक बिना किसी पैरोल के जेल में रहा है और उसने जेल में अच्छा व्यवहार दिखाया है। इसी आधार पर 25 साल के बाद जीवन कारावासियों को माफी मिलती है, जैसा कि ओडिशा की 2022 की पूर्व-रिहाई नीति में निर्धारित है।
अद्यतन जानकारी की आवश्यकता
ओडिशा के अधिवक्ता जनरल, पिताम्बर आचार्य, ने बताया कि जेल और जिला प्रशासन द्वारा 2025 के रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए हैं, इसलिए बोर्ड को नवीनतम डेटा चाहिए। यह प्रक्रिया अभी भी चल रही है, और बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी स्थिति की सूचना दी है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि बोर्ड दारा सिंह को माफी देता है, तो यह भारत में धार्मिक संवेदनशील मामलों में दंड नीति के पुनर्विचार को उजागर करेगा। इस निर्णय का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, विशेषकर उन समूहों के बीच जो धार्मिक उग्रता और न्याय के बीच संतुलन चाहते हैं।