केंद्रीय मिट्टी एवं सामग्री अनुसंधान स्टेशन (CSMRS) ने पोलावाराम जलभवन परियोजना में उपयोग हो रही मिट्टी व रेत की गुणवत्ता की जांच की। दो प्रकार के नमूनों ने सभी मानक पूरे किए, और अगले दो दिनों में अतिरिक्त सामग्री की जांच जारी रहेगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पोलावाराम परियोजना में उपयोग होने वाली मिट्टी और रेत की गुणवत्ता सत्यापित
- CSMRS ने दो प्रकार की मिट्टी-रेत के नमूने परीक्षण किए और मानकों को पूरा पाया
- आगामी दो दिनों में अतिरिक्त सामग्री की जांच जारी रहेगी
पोलावाराम जलभवन परियोजना के लिए केंद्रीय मिट्टी एवं सामग्री अनुसंधान स्टेशन (CSMRS) की एक विशेषज्ञ टीम ने मंगलवार को गुणवत्ता जांच शुरू की। यह जांच परियोजना के नियतकालिक निरीक्षण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में की गई, जिसमें दो दिनों तक निरंतर परीक्षण जारी रहेगा।
जाँच की प्रक्रिया और परिणाम
हरेन्द्र प्रकाश, अविनाश आनंद श्रीवास्तव, गौरव पंडिया और विजय प्रताप सिंह सहित चार विशेषज्ञों ने ईसीआरएफ (Earth-cum-Rock Fill) बांध के निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी और रेत के दो प्रकार के नमूनों का सख्त परीक्षण किया। प्रोजेक्ट अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों नमूनों ने निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा किया।
भविष्य की जांच योजना
आगामी बुधवार और गुरुवार को भी समान प्रक्रिया दो अतिरिक्त सामग्री वर्गों पर लागू की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी निर्माण सामग्री राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।
उपस्थिति और सहयोग
जांच में जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता श्रीनिवास, उप कार्यकारी अभियंता निर्मला, MEIL पोलावाराम परियोजना के जनरल मैनेजर ए. गांगाधर, तथा डिप्टी जनरल मैनेजर मुरली पम्मी और गुट्टापति शंकरैया सहित WAPCOS के कई अधिकारी भी शामिल थे।
पोलावाराम परियोजना का महत्व
पोलावाराम जलभवन, जो द्वीप राज्य में जल आपूर्ति, सिचाई और विद्युत उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है, भारत की सबसे बड़ी बहु‑उद्देश्यीय जल संसाधन परियोजनाओं में से एक है। ऐसी बड़ी परियोजना में सामग्री की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी न केवल संरचनात्मक स्थिरता बल्कि पर्यावरणीय संरक्षण के लिए भी अत्यावश्यक है।