कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्र टीम भेजने का अनुरोध किया है, ताकि राज्य में बढ़ते सूखे की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया जा सके। वर्षा की कमी, जलाशयों का घटता स्तर और कृषि के लिए जोखिम को लेकर सरकार ने त्वरित कदम उठाने की अपील की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक में 30% वर्षा घाटा, जलाशय क्षमता केवल 34% पर
- मुख्यमंत्री ने केंद्र की टीम को सूखा मूल्यांकन के लिए बुलाया
- फसल उत्पादन, पेयजल और ग्रामीण आजीविका पर गंभीर असर
कर्नाटक भारत के सबसे अधिक सूखा‑प्रवण राज्यों में से एक है, जहाँ 77% क्षेत्र अर्द्ध‑शुष्क और शुष्क जलवायु में स्थित है। इस वर्ष दक्षिणपश्चिमी मानसून की अनियमितता ने राज्य के 31 जिलों में से 18 में भारी वर्षा कमी दर्ज की, जिससे कुल 141 तालुकों में ‘बड़े‑घाटा’ की स्थिति बनी है।
वर्षा की कमी और इसका प्रभाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, एल निनो प्रभाव के कारण कर्नाटक को अब तक केवल 203 मिलीमीटर वर्षा मिली, जबकि औसत 292 मिलीमीटर की अपेक्षा 30% कम है। यह कमी न केवल जलभंडारण को प्रभावित कर रही है, बल्कि खेतों में बीज बोने की शुरुआत को भी बाधित कर रही है; जुलाई के पहले सप्ताह में केवल 28.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खरीफ की बुवाई हुई, जबकि लक्ष्य 84.10 लाख हेक्टेयर था।
जलाशयों की स्थिति
राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों का संयुक्त भंडारण 303 टेन थाउज़ंड क्यूबिक फीट (tmcft) है, जो उनकी कुल क्षमता 895.65 tmcft का सिर्फ 34% है। जलस्तर में यह गिरावट न केवल सिंचाई को, बल्कि पेयजल आपूर्ति, हाइड्रोपावर उत्पादन और जलस्रोतों के दीर्घकालिक स्थायित्व को भी खतरे में डाल रही है।
कृषि और जीवन यापन पर असर
कर्नाटक देश के प्रमुख दाल (तूर) उत्पादनकर्ता में से एक है। यदि इस फसल की पैदावार में गिरावट आती है, तो राष्ट्रीय स्तर पर दाल की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कृषि सलाह, जिला‑विशिष्ट आपातकालीन योजनाएं और सूखा‑शमन उपाय लागू किए हैं, साथ ही जलाशयों के जल को पेयजल के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक पहलू
शिवाकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखित अनुरोध में कहा कि एक केंद्रीय टीम की त्वरित जाँच से जमीन पर सूखे की वास्तविक तीव्रता का आकलन होगा, जिससे किसानों को आश्वासन मिलेगा और केंद्र सरकार की सहायता समय पर पहुँच सकेगी। यह कदम न केवल कर्नाटक की जलसंकट को कम करने में मदद करेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों को समझने के लिए एक मॉडल भी स्थापित कर सकता है।
यह भी पढ़ें
- लद्दाख के संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत ऑफ‑रोडिंग पर गुरुग्राम के 12 बाइकरों और उत्तर प्रदेश के SUV चालक को कुल 1.7 लाख रु. जुर्माना
- पिम्प्री-चिंचवाड़ में मोशी डिपो फिर से खुला, 9 मृतकों के बाद 6 दिन में आंशिक पुनः संचालन
- पोलैंड के 90 साल पुराने टेढ़े-मेढ़े जंगल की रहस्यमयी उत्पत्ति को वैज्ञानिकों ने सुलझाने की दौड़