पिम्प्री-चिंचवाड़ नगर निगम ने भारी बारिश में गिरे कचरे के ढहने के बाद मोशी कचरा डिपो को आंशिक रूप से फिर से खोल दिया है। अभी केवल मेडिकल, सीएनजी‑संबंधित और रसोई कचरे को ही इस स्थल पर डाला जा रहा है, जबकि शेष कचरा अन्य सुविधाओं में ले जाया जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मोशी डिपो 6 दिनों के बाद आंशिक रूप से पुनः खोला गया
  • केवल मेडिकल, सीएनजी और रसोई कचरे को ही अब डिपो में डाला जा रहा है
  • डिपो में हुई ढहाव से 9 कर्मियों की मृत्यु, जिम्मेदारी जांच के दायरे में

पिम्प्री-चिंचवाड़ नगर निगम (PCMC) ने 8 जुलाई को भारी वर्षा के दौरान मोशी कचरा डिपो के एक हिस्से के ढहने के बाद, नौ कर्मचारियों की जान ले ली जाने के शोक को भुलाते हुए, डिपो को आंशिक रूप से पुनः खोला। इस घटना में कचरे की ढेराव से बनी गाड़ी एक कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजना की प्रशासनिक इमारत पर गिर गई थी, जिससे बड़ी मानव हानि हुई।

डिपो की वर्तमान स्थिति

PCMC के मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्बासे ने बताया कि अब केवल मेडिकल कचरा, सीएनजी‑संबंधित कचरा और रसोई कचरा को ही मोशी डिपो में डाला जा रहा है। यह कचरा दुर्घटना स्थल से दूर एक अलग जगह पर जमा किया जा रहा है, जिससे पुनः किसी तरह की ढहाव की संभावना कम हो। ओम्बासे ने कहा कि वे तीन दिनों के भीतर बचे हुए मलबे को साफ करने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद सामान्य कचरा डम्पिंग फिर से शुरू होगी।

वैकल्पिक सुविधाओं की ओर रुख

डिपो बंद होने के बाद से PCMC ने शहर के कचरे को दो वैकल्पिक स्थलों में भेजा है – खड़की कैंटनमेंट बोर्ड के तहत चल रहे डम्प साइट और देहू में स्थित अन्य सुविधा। प्रति दिन 1,400‑1,500 टन कचरा उत्पन्न करने वाले शहर के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण व्यवधान रहा, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में 400‑500 ट्रकों को मोशी डिपो तक पहुँचाया जाता था।

जिम्मेदारी और जांच

डिपो के पूर्व मुख्य अभियंता संजय कुलकर्णी और योगेश अल्हात को इस दुर्घटना में लापरवाही का आरोप लगाकर नोटिस जारी किए गए थे। नगरपालिका ने एंटीनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्रा. Ltd. को भी “गंभीर लापरवाही” का आरोप लगाते हुए शो‑कॉज़ नोटिस भेजा। कंपनी और दोनों अधिकारियों ने जवाब में कहा कि अत्यधिक वर्षा के कारण कचरा ढेर अस्थिर हो गया था, और उन्होंने इस पर कोई गलती नहीं मानी। नगरपालिका ने इन उत्तरों की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय करने का वादा किया है।

भविष्य की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि मोशी जैसे बड़े कचरा डिपो में संरचनात्मक स्थिरता, जल निकासी और नियमित निरीक्षण को मजबूत करना आवश्यक है। यह घटना कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा की जरूरत को भी उजागर करती है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सके।