सिरुथुली ने कोइंबटूर के प्रमुख शहरी जलस्रोत सिंहनल्लुर झील के पुनरुज्जीवन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया। नगरपालिका आयुक्त, स्थानीय नेता और विभिन्न हितधारकों ने मिलकर जल गुणवत्ता सुधार, सीवेज उपचार और सतत प्रबंधन पर चर्चा की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सिरुथुली ने सिंहनल्लुर झील की पुनर्स्थापना के लिए व्यापक योजना का आदेश दिया।
  • सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल को झील में डालने का प्रस्ताव।
  • स्थानीय समुदाय, सरकार और विशेषज्ञों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम।

कोइंबटूर शहर के प्रमुख शहरी जलस्रोतों में से एक, सिंहनल्लुर झील, अब सिरुथुली की सक्रिय पहल के तहत पुनरुद्धार के चरण में प्रवेश कर रही है। 14 जुलाई, 2026 को कोइंबटूर निगम आयुक्त कत्ता रवि तेज़ा, नगर निगम के अधिकारी और सिरुथुली की टीम ने झील की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण किया और सुधार के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की।

पृष्ठभूमि एवं महत्व

सिंगनल्लुर झील न केवल शहर की जल आपूर्ति को पूरक करती है, बल्कि भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता, मत्स्य पालन और कृषि के लिए भी जीवनरेखा है। दशकों में यह झील अनियंत्रित सीवेज, जल प्रदूषण और निकासी में गड़बड़ी के कारण गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है।

हितधारकों की भागीदारी

सिरुथुली ने सोमवार को एक व्यापक हितधारक बैठक बुलाई, जिसमें निगम आयुक्त, सिंहनल्लुर के विधायक के.एस. श्री गिरी प्रसाद, सिरुथुली की प्रबंध ट्रस्टी वनीता मोहन, पी.एस.जी. एंड संस चैरिटी, सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, मछुआरों की संघ और स्थानीय किसानों को शामिल किया गया। इस बैठक में उपचारित जल को उक्कडम और नंजुंदापुरम के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से झील में प्रवाहित करने, सीवेज उपचार, जल गुणवत्ता सुधार और दीर्घकालिक प्रबंधन ढाँचा तैयार करने पर विचार विमर्श हुआ।

मुख्य चुनौतियां एवं समाधान

झील के पुनरुद्धार में मुख्य चुनौतियां हैं: बेजान जल, अनियंत्रित सीवेज प्रवेश, तलछट (सिल्ट) की अधिकता और जलस्रोत का अनियोजित उपयोग। सिरुथुली ने पहले ही तलछट हटाने, सीवेज को पुनः दिशा देने और उन्नत जल शोधन तकनीकों को लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, झील के किनारे हरित पट्टी स्थापित कर जैव विविधता को बढ़ावा देने की योजना भी तैयार की गई है।

भविष्य की दिशा

इस पहल का लक्ष्य केवल जल को शुद्ध करना नहीं, बल्कि एक स्थायी शहरी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा, आर्थिक अवसर और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करे। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल दक्षिण भारत के अन्य जलस्रोतों के पुनरुद्धार के लिए एक मानक बन सकता है।