संयुक्त राज्य गृह सुरक्षा विभाग ने नए नियम लागू किए हैं, जिससे F‑1 वीज़ा वाले विदेशी छात्र अब अधिकतम चार साल ही रह सकते हैं और उनका ग्रेस पीरियड आधा कर दिया गया है। साथ ही, प्रथम वर्ष में कार्यक्रम, प्रमुख या शैक्षणिक स्तर बदलने पर प्रतिबंध लगेंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • F‑1 वीज़ा की अवधि अब अधिकतम चार साल तक सीमित
  • ग्रेस पीरियड 60 दिन से घटकर 30 दिन
  • अंतिम वर्ष में कार्यक्रम या स्तर बदलने पर प्रतिबंध

संयुक्त राज्य गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने एक व्यापक नियामक परिवर्तन अंतिम रूप दिया है, जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के F‑1 वीज़ा की अवधि को स्थायी चार‑साल की सीमा में सीमित किया गया है। यह परिवर्तन न केवल उच्च शिक्षा की लागत बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों के भविष्य को भी अस्थिर करेगा।

नियमों का विस्तृत विवरण

नए नियम के तहत अधिकांश F‑1 वीज़ा धारक अब अधिकतम चार साल तक ही यू.एस. में पढ़ाई कर सकेंगे, जबकि अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भर्ती छात्रों को कुल 24 महीने की अवधि दी जाएगी। साथ ही, ग्रेस पीरियड को पहले के 60 दिनों से घटाकर केवल 30 दिन किया गया है, जिससे छात्र को देश छोड़ने या वीज़ा विस्तार की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम समय मिलेगा।

शैक्षणिक लचीलापन पर प्रतिबंध

पहले वर्ष में स्नातक छात्रों को अपने अध्ययन कार्यक्रम, प्रमुख या शैक्षणिक स्तर बदलने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय दुर्लभ मामलों के। स्नातकोत्तर छात्रों पर और भी कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं—उन्हें अपने कार्यक्रम या अध्ययन क्षेत्र बदलने की कोई सुविधा नहीं मिलेगी। एक बार किसी स्तर पर कार्यक्रम पूरा करने के बाद, वही या निम्न स्तर का दूसरा कार्यक्रम F‑1 स्थिति में नहीं किया जा सकेगा।

भारत के छात्रों पर प्रभाव

भारत अभी भी यू.एस. में सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय छात्र समूह है; 2024‑25 शैक्षणिक वर्ष में लगभग 3.6 लाख भारतीय छात्र पढ़ रहे थे, जो कुल 11 लाख अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का 31 % बनाते हैं। नई नीति के कारण इन छात्रों को वीज़ा विस्तार के लिए बार‑बार USCIS की मंजूरी लेनी पड़ेगी, जिससे समय और वित्तीय बोझ दोनों में वृद्धि होगी।

निज़ी एवं कानूनी चुनौतियां

अधिकांश छात्र वीज़ा विस्तार प्रक्रिया में देरी, बायोमैट्रिक डेटा प्रदान करने और अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण की मांग का सामना करेंगे। समय पर विस्तार न करने पर अवैध प्रवास गिनती शुरू हो सकती है, जिससे तीन‑या दस‑साल की पुनः प्रवेश प्रतिबंध लग सकता है। कई प्रवासी वकीलों ने इस नियम को “अनजाने में गंभीर परिणाम” वाला बताया है।

इन नियमों का लक्ष्य शैक्षणिक धोखाधड़ी को रोकना है, परन्तु आलोचकों का मानना है कि यह वास्तविक शैक्षणिक परिवर्तन को “धोखा” कह कर दंडित करता है, जो छात्रों की करियर विकास के लिए हानिकारक है।