शिक्षा विभाग ने 108 सरकारी स्कूलों की विस्तृत जाँच के बाद 14 स्कूलों को ध्वस्त करने का प्रस्ताव दिया, जिनमें से सात को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। नई भूकंप‑प्रतिरोधी चार‑मंजिला इमारतों के निर्माण के लिए कार्य जल्द शुरू होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 14 सरकारी स्कूलों को ध्वस्त करने का आदेश
- 7 स्कूलों को मिली पूर्ण या अंशिक मंजूरी
- नए भूकंप प्रतिरोधी 4-स्तरीय इमारतों का निर्माण योजना
दिल्ली सरकार ने अपनी शिक्षा बुनियादी ढांचा सुधार पहल के तहत शिक्षा विभाग (DoE) द्वारा 108 सरकारी स्कूलों की व्यापक डिजिटल प्रोफाइलिंग और तृतीय‑पक्षीय संरचनात्मक ऑडिट पूरा कर लिया है। इस प्रक्रिया में 54 स्कूलों की रिपोर्टें पहले ही जमा हो चुकी हैं, जिनमें 14 स्कूलों की इमारतें 40 साल से अधिक पुरानी और खतरनाक स्थिति में पाई गईं।
पृष्ठभूमि और कारण
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का निर्देश दिया था, जिससे कक्षा‑से‑छात्र अनुपात, ओवरक्राउडिंग और सुरक्षा मानकों को सुधारना प्रमुख लक्ष्य बन गया। इन निर्देशों के अनुपालन में DoE ने सभी सरकारी स्कूलों की संरचनात्मक स्थिरता, विद्युत‑प्लंबिंग, अग्नि‑सुरक्षा और सार्वभौमिक पहुँच मानकों की जाँच की। कई स्कूल अभी भी टिन के शेड या अधूरी इमारतों में चल रहे हैं, जिससे छात्रों की सीखने की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ऑडिट के प्रमुख निष्कर्ष
ऑडिट रिपोर्टों ने बताया कि 14 स्कूलों की इमारतें पूरी या आंशिक ध्वस्त करने योग्य हैं। इन स्कूलों में से सात—चिल्ला गाँव, जासोला गाँव, कराला, बापरोला, मतियाला, नेब सराय और शिवाजी पार्क—को पिछले 45 दिनों में पूरी या अंशिक ध्वस्त करने की मंजूरी मिल चुकी है। शेष सात स्कूलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया जारी है और अगले कुछ हफ्तों में पूरी होने की उम्मीद है।
भविष्य की योजना
ध्वस्त होने वाले स्कूलों की जगह स्थायी ग्राउंड+4 (भू‑स्तर + चार मंजिला) भूकंप‑प्रतिरोधी इमारतें बनायी जाएँगी, जिसका लक्ष्य एक साल के भीतर पूर्ण कार्य पूर्ण करना है। निर्माण अवधि के दौरान छात्रों को उसी स्कूल के अन्य ब्लॉकों में या निकटवर्ती स्कूलों में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही 27 खाली ज़मीनी टुकड़ों पर भी समान संरचना बनाकर कक्षा क्षमता बढ़ाने, ओवरक्राउडिंग कम करने और छात्र‑शिक्षक अनुपात सुधारने की योजना है।
सम्पूर्ण प्रभाव
यह पहल न केवल सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा और भविष्य में संभावित भूकंपों के प्रति लचीलापन भी सुनिश्चित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को समय पर लागू किया गया तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक बन सकता है।