विरुंधनगर जिले के सरकारी स्कूल के तीन विद्यार्थियों ने राज्य‑स्तरीय कोचिंग योजनाओं का लाभ उठाकर IIT मद्रास और दो NIT संस्थानों में प्रवेश किया। यह सफलता सरकारी शिक्षा‑सहायता के प्रभाव को उजागर करती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • VETRI और Thisai कार्यक्रम ने ग्रामीण छात्रों को शीर्ष संस्थानों में प्रवेश दिलाया
  • सरकारी समर्थन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं
  • जिलाधिकारी ने छात्रों के सम्पूर्ण अध्ययन के लिये अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने का वचन दिया

विरुंधनगर जिला कलेक्टर श्री एन.ओ. सुखापुत्र ने तीन सरकारी स्कूल के छात्रों को उनके IIT‑मद्रास और NIT प्रवेश समारोह में सम्मानित किया। ये छात्र म. लोघेश, आर. अरुमुगवेलन राघवन और आई. धरनिया हैं, जिन्होंने राज्य के विशेष कोचिंग योजनाओं – VETRI (Vibrant Education Targeting Reputed Institution) और Thisai – का पूर्ण लाभ उठाया।

VETRI पल्लिगल और Thisai कार्यक्रम की भूमिका

टामिलनाडु सरकार ने VETRI पल्लिगल योजना के तहत सप्ताहांत कोचिंग प्रदान की, जिससे छात्र राष्ट्रीय स्तर के प्रवेश परीक्षाओं (JEE, NEET) की तैयारी कर सकें। इसके बाद, विराटनगर जिला प्रशासन ने Thisai नामक एक महीने‑लंबे आवासीय प्रशिक्षण शिविर की व्यवस्था की, जहाँ गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के विशेषज्ञ शिक्षकों ने छात्रों को प्रतिदिन 9 वजे से 5:30 वजे तक गहन पाठ पढ़ाया। इस कठोर प्रशिक्षण ने छात्रों को OMR‑आधारित परीक्षणों के माध्यम से निरंतर मूल्यांकन भी कराया।

व्यक्तिगत संघर्ष और सफलता

लोघेश, जो श्रीविलिपुट्टूर के नगरपालिका हाई स्कूल से था, ने अपनी विधवा माँ की कठिनाइयों को देखते हुए इंजीनियरिंग में सरकारी कॉलेज की सीट के बजाय IIT‑मद्रास में रासायनिक अभियांत्रिकी की सीट हासिल की। वह बताता है, “यदि कलेक्टर और शिक्षकों ने यह अवसर नहीं दिया होता, तो मैं इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाता।” इसी तरह, धरनिया, जो एक निर्माण श्रमिक की बेटी है, ने 15‑दिन के आवासीय शिविर के बाद हरियाणा के NIT में फूड टेक्नोलॉजी की सीट प्राप्त की। राघवन, दैनिक वेतनभोगी के बेटे, ने VETRI के साप्ताहिक कोचिंग के साथ-साथ इस शिविर में भाग लेकर हैदराबाद के NIT में फूड सिक्योरिटी और डिवेलपमेंट की सीट हासिल की, जबकि वह गतिशीलता विकलांगता से भी जूझ रहा था।

भविष्य की प्रतिबद्धताएँ

कलेक्टर सुखापुत्र ने इन छात्रों की मेहनत और सरकारी कार्यक्रमों के प्रभाव को सराहते हुए घोषणा की कि उनकी पूरी पढ़ाई के लिये अतिरिक्त संसाधन जुटाए जाएंगे। यह प्रतिबद्धता न केवल इन तीन छात्रों के लिये बल्कि समान परिस्थितियों में रहने वाले अन्य छात्रों के लिये भी आशा की किरण बनती है।

शिक्षा नीति पर व्यापक प्रभाव

यह सफलता दर्शाती है कि सही लक्ष्य‑निर्देशित कोचिंग और राज्य‑सहायता से सामाजिक‑आर्थिक बाधाओं को पार कर, ग्रामीण और कम आय वाले छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश दिलाया जा सकता है। यदि अन्य जिलों में समान मॉडल अपनाया जाए, तो यह भारत की समग्र तकनीकी शिक्षा को सुदृढ़ कर सकता है।