त्रिवनन्तपुर में कोवडियार स्थित भावना-प्रयाण आर्ट हब में चल रही ‘बॉडिज़ वी कैरी’ प्रदर्शनी सात कलाकारों के माध्यम से शरीर, आत्म और स्मृति की विविध परिभाषाओं को उजागर करती है। इस बहु‑माध्यमीय कार्यक्रम में पेंटिंग, पोस्टकार्ड, खाद्य‑स्थापना और पर्चे के प्रयोग से शरीर के शारीरिक व मानसिक आयामों को नया दृष्टिकोण मिला है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सात कलाकारों की विविध अभिव्यक्तियों के माध्यम से शरीर की शारीरिक‑मानसिक परिभाषा का अन्वेषण
  • कैनवास, पोस्टकार्ड, खाद्य‑स्थापना और पर्चे जैसे विभिन्न माध्यमों का प्रयोग
  • कोवडियार में भावना‑प्रयाण आर्ट हब में 15 जुलाई तक मुफ्त प्रवेश

त्रिवनन्तपुर के कोवडियार में स्थित भावना‑प्रयाण आर्ट हब में ‘बॉडिज़ वी कैरी’ प्रदर्शनी कला प्रेमियों के बीच तेज़ी से चर्चा का विषय बन गई है। त्रिवा द्वारा आयोजित यह पहल शारीरिक अस्तित्व, भावनात्मक स्मृति और सामाजिक पहचान के बीच के जटिल संबंधों को नयी दृष्टि से प्रस्तुत करती है।

पर्यवेक्षक का दृष्टिकोण

कलाकार श्रीकृष्णन के.पी. ने इस कार्यक्रम को क्यूरेट किया है, जिनका मानना है कि शरीर केवल शारीरिक रूप नहीं, बल्कि सपनों, यादों और सांस्कृतिक बोझों का संग्रह है। उन्होंने अन्य प्रदर्शनी में विनीथा विल्फ्रेड के कार्य को देख कर इस थीम को चुना, और फिर उन कलाकारों को बुलाया जिनके कार्य इस विचार के साथ सामंजस्य रखते थे।

कलाकारों की विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ

विनीथा विल्फ्रेड ने पाँच एक्रेलिक पेंटिंग बनाई हैं, जो महिला शरीर को शक्ति के स्तम्भ के रूप में दर्शाती हैं। उनकी ‘Wounded Beautiful Moment’ में एक बिल्ली द्वारा पैर पर लगी चोट को सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

रॉबर्ट लोपेज़ ने जलरंग के माध्यम से अमूर्त आकार और जीवंत रंगों के साथ शरीर की आंतरिक खोज को अभिव्यक्त किया है, जो दर्शकों को व्यक्तिगत जागरूकता की ओर आमंत्रित करता है।

फ़िरोज़ नेदीयथ जलरंग और पेन से स्मृति एवं दर्द को उजागर किया है, पोस्टकार्ड को धुंधला कर नई कहानी बनाते हैं। उनकी ‘Blossom of the World of Nude’ और ‘Mermaid’ में प्रकृति और यौनिकता का मिलन स्पष्ट होता है।

रहाना की प्रकृति‑चित्रण हरे‑भरे रंगों में लिपटी है, जो वन की रहस्यमयी गहराई को दर्शाती है। लालकुमार के. ने सरकारी नौकरी के दौरान शारीरिक गतिशीलता को जलरंग‑पेन से दर्शाया है, जबकि अनु कैलिकल ने मानसिक स्वास्थ्य के संघर्ष को कागज पर फँसी आत्मा के रूप में प्रस्तुत किया है।

बहु‑प्रतिभाशाली शिहाब वी.सी. ने कला और पाक‑कौशल को मिलाकर एक इंटरेक्टिव इंस्टॉलेशन बनाया, जहाँ स्वाद की अनुभूति को भी शरीर की विस्तार माना गया है। उन्होंने प्रदर्शनी के उद्घाटन और समापन दोनों दिन एक विशेष व्यंजन प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक महत्व और भविष्य की दिशा

‘बॉडिज़ वी कैरी’ न केवल व्यक्तिगत शारीरिकता का जश्न मनाती है, बल्कि सामाजिक मानदंडों, लिंग‑भेद और पर्यावरणीय परिवर्तन के प्रभावों को भी उजागर करती है। इस प्रकार की बहु‑माध्यमीय प्रदर्शनी भारतीय समकालीन कला में नई आवाज़ें लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भ्रमण जानकारी

प्रदर्शनी 14 जुलाई से 15 जुलाई, दोपहर 11:30 से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी। प्रवेश निःशुल्क है, जिससे सभी वर्ग के दर्शक इस विचार‑सम्पन्न यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।