भारत के समुद्री नियामक ने सभी जहाज़ मालिकों और भर्ती एजेंसियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों को तैनात करने से रोकने का निर्देश दिया है। यह कदम हाल ही में पश्चिम एशिया में हुए कई जहाज़ हमलों के बाद उठाया गया है, जिसमें 30 भारतीय नाविकों वाले दो वाणिज्यिक जहाज़ शामिल थे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- DG Shipping ने होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाया।
- पश्चिम एशिया में हालिया हमलों ने सुरक्षा जोखिम को बढ़ा दिया है।
- नियमित निगरानी और जहाज़‑दर‑जहाज़ डैशबोर्ड की मांग की गई है।
भारत के समुद्री नियामक, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग (DG Shipping) ने 17 जुलाई को एक आधिकारिक सलाह जारी की, जिसमें सभी शिपओनर, शिप मैनेजर और भर्ती‑स्थापना सेवाओं (RPS) को निर्देश दिया गया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में गुजरने वाले जहाज़ों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें, जब तक कि आगे कोई आदेश न दिया जाए।
पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह में पश्चिम एशिया के जलमार्गों में पाँच विदेशी ध्वज वाले मालवाहक जहाज़ों पर हमले हुए, जिनमें दो वाणिज्यिक जहाज़ों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। इन घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा दीं, विशेषकर यूएस द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण जहाज़ों को बायपास करने के प्रयासों के बाद।
नियामक का बयान
DG Shipping ने कहा, "गुफ़़्तगू वाले क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ी है, जिसमें भारतीय नाविकों की जान‑माल को नुकसान पहुँचाने वाले कई हमले शामिल हैं। इसलिए हम भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस क्षेत्र में तैनाती पर प्रतिबंध लगा रहे हैं।" इस निर्देश में सुरक्षा और जोखिम‑प्रबंधन के लिये अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
पहले के कदम
एक माह पहले, DG Shipping ने पहले ही जहाज़ मालिकों और भर्ती एजेंसियों से इस क्षेत्र में नाविकों की तैनाती को सीमित करने का अनुरोध किया था, जब कुछ वाणिज्यिक जहाज़ों को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचते हुए हमलावरों ने निशाना बनाया था। अब शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जहाज़ की स्थिति को ट्रैक करने के लिये एक ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार किया जाए, जिससे वास्तविक‑समय में जोखिम का आकलन किया जा सके।
भविष्य की संभावनाएँ
यह आदेश भारत के समुद्री उद्योग में एक गंभीर चेतावनी संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि क्षेत्र में तनाव जारी रहता है, तो यह प्रतिबंध दीर्घकालिक रूप से जारी रह सकता है, जिससे भारतीय नाविकों की रोजगार संभावनाओं और अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ साझेदारी पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह कदम अन्य देशों के समुद्री नियामकों को भी समान सुरक्षा उपाय अपनाने के लिये प्रेरित कर सकता है।