कर्नाटक में कांग्रेस ने स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (PRC) और विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) को अपना वोटर आधार मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया, जबकि भाजपा का विरोध सीमित प्रभाव रखता है। यह रणनीति आगामी राज्य चुनावों की दिशा को पुनः परिभाषित कर सकती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस ने PRC जारी कर वोटर एन्क्लोजर बढ़ाया
- बीजेपी ने इस कदम को वैधता के बिना विरोध किया
- SIR प्रक्रिया में 7 लाख नाम अभी भी अनसुलझे हैं
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सत्ता में आने के बाद ही स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने की योजना को लागू किया, जिससे विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के दौरान मतदाता सूची को साफ़ किया जा सके। यह कदम कांग्रेस के लिए केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है, क्योंकि यह संभावित वोटर को अपने पक्ष में लाने का अवसर प्रदान करता है।
पार्श्वभूमि और इतिहास
2002 में कर्नाटक में आखिरी बार व्यापक SIR किया गया था, तब 5.08 करोड़ मतदाता सूची में दर्ज थे। इस बार, निर्वाचन आयोग ने दो सप्ताह का विस्तार कर 8 अगस्त तक नामांकन समाप्त करने का समय दिया, जबकि ड्राफ्ट सूची 17 अगस्त को प्रकाशित होगी। इस प्रक्रिया में 7 लाख नामों की फॉर्म अभी भी एकत्र नहीं हुई है, जिससे राजनीतिक संघर्ष तेज़ हो रहा है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस ने 54,000 से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) स्थापित कर जमीनी स्तर पर मतदान प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है। साथ ही, बड़े पैमाने पर नामांकन शिविरों का आयोजन किया गया, जहाँ जनता को फॉर्म भरने में सहायता दी गई। PRC, जिसे राज्य सरकार ने पेश किया, मौजूदा डोमिसाइल प्रमाणपत्र की तरह कार्य करता है और निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेज़ों में से एक है। यह दस्तावेज़ मतदाता के जन्मस्थान, निवास अवधि, शिक्षा आदि को प्रमाणित करता है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने इस पहल को “ग़ैरकानूनी प्रवासियों को सुरक्षित करने” का आरोप लगाते हुए आलोचना की। राज्य अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने इसे “धोखा” कहा, जबकि केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप की मांग करने वाले पत्र को भी कांग्रेस ने “राजनीतिक चयनात्मकता” बताया। भाजपा और जेडी(एस) ने यह भी कहा कि एन्क्लोजर कैंप सार्वजनिक स्थानों पर फॉर्म जमा करने को बढ़ावा देते हैं, जिससे घर‑घर सत्यापन नहीं हो पाता।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि कांग्रेस सफलतापूर्वक 7 लाख अनसुलझे नामों को सूचीबद्ध कर लेती है, तो यह आगामी विधानसभा चुनावों में एक महत्वपूर्ण वोटर ब्लॉक बन सकता है। दूसरी ओर, भाजपा को अपनी जमीनी तैनाती को पुनः व्यवस्थित करना पड़ेगा, ताकि वह इस रणनीतिक बदलाव का मुकाबला कर सके। इस दौर में, चुनावी रणनीतियों का संतुलन राज्य की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करेगा।