विजाग के आसपास प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर सिपीआई और सिपीआई(एम) ने पर्यावरण, जल और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संभावित नकारात्मक प्रभावों का हवाला देते हुए विरोध बढ़ा दिया है। दोनों दलों ने सरकारी अनुमोदन और भूमि आवंटन रद्द करने की माँग की और व्यापक सार्वजनिक भागीदारी का अनुरोध किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विजाग में प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं पर पर्यावरणीय चिंताएँ
- सीपीआई और सीपीआई(एम) ने सरकारी अनुमोदन रद्द करने की माँग की
- स्थानीय जल, बिजली और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
विजाग में दो प्रमुख बाएँ दल, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (सीपीआई(एम)), ने राज्य सरकार द्वारा मंजूर किए गए डेटा सेंटर परियोजनाओं के खिलाफ अपनी विरोधी आवाज़ को और तेज़ कर दिया है। इस विरोध का मुख्य आधार पर्यावरणीय क्षति, पेयजल स्रोतों पर दबाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम है।
प्रस्तावित परियोजनाओं का विवरण
सीपीआई ने अरिलोवा के पेडागडिली जंक्शन पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया, जहाँ दो पार्टी नेताओं ने सिर कटा और कार्यकर्ता एक मानव श्रृंखला बनाकर सरकार से अनुमोदन और भूमि आवंटन वापस लेने की मांग की। उन्होंने बताया कि मूदासरलोवा डेटा सेंटर के लिए 512 मेगावॉट की शक्ति आवश्यक होगी, जो स्थानीय जल और विद्युत संसाधनों पर भारी बोझ डाल सकती है। इसके अलावा, टार्लुवाड़ा और रामबिल्ली में प्रस्तावित अन्य केंद्रों से निकटवर्ती आवासीय क्षेत्रों में गर्मी, शोर और प्रदूषण की आशंका है।
सीपीआई(एम) का रैली और तर्क
सीपीआई(एम) ने आरीलोवा के टीआईसी पॉइंट पर मोटरसाइकिल रैली के बाद सार्वजनिक सभा आयोजित की, जहाँ केंद्रीय समिति सदस्य के. लोकेनाधम और जिला सचिव एम. जग्गु नायडू ने कहा कि डेटा सेंटर को जलाशय के पास और आवासीय क्षेत्रों के निकट स्थित करने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और पेयजल आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी उजागर किया कि अभी तक आसपास के निवासियों को घर-स्थल पट्टे नहीं मिले हैं, जिससे भूमि आवंटन की वैधता प्रश्नांकित होती है।
भविष्य की संभावनाएँ और मांगें
दोनों दलों ने सरकार से परियोजनाओं को गैर-आवासीय क्षेत्रों में स्थानांतरित करने और रोजगार सृजन के वास्तविक आंकड़ों को स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने व्यापक सार्वजनिक भागीदारी, पारदर्शी परामर्श और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को अनिवार्य करने की भी मांग की है, जिससे दीर्घकालिक सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
इतिहास और प्रासंगिकता
विजाग, जो पूर्वी तट पर एक प्रमुख औद्योगिक हब है, में डेटा सेंटर जैसी बड़ी निवेश परियोजनाएँ अक्सर सामाजिक-पर्यावरणीय टकराव का कारण बनती रही हैं। पिछले दशकों में समान परियोजनाओं के कारण जलस्तर में गिरावट, वायु प्रदूषण और स्थानीय समुदायों के विस्थापन की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इसलिए, इस विरोध को केवल एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि सतत शहरी योजना के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है।