वेस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधikari ने कोलकाता में आयोजित 55वें ISKCON रथ यात्रा में भाग लेकर पूजा‑पाठ किया। साथ ही भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस धार्मिक आयोजन में अपनी उपस्थिति दर्ज की और मध्याह्न भोजन योजना को ISKCON को सौंपने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुवेंदु अधikari ने रथ यात्रा में भाग लिया और रथ का रस्सी खींचा
- BJP के वरिष्ठ नेताओं ने भी समारोह में भाग लिया
- मुख्यमंत्री ने मध्याह्न भोजन योजना ISKCON को सौंपने की योजना दोहराई
- सरकार ने रथ यात्रा के आयोजकों को 5 लाख रुपये नकद सहायता दी
वेस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधikari ने गुरुवार, 16 जुलाई को कोलकाता के अल्बर्ट रोड पर आयोजित 55वें ISKCON रथ यात्रा समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने 'छेड़ा पहारा' रिवाज़ निभाते हुए जगन्नाथ रथ की रस्सी खींची, जो इस धार्मिक यात्रा का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वह एक भक्त के रूप में इस तीर्थयात्रा को देख रहा है, न कि कोई राजनीतिक मंच।
रथ यात्रा में सीएम की भूमिका
रथ यात्रा के मुख्य मंच पर उपस्थित होने के बाद, अधikari ने ताम्लुक और मेचेड़ा, पूर्वा मेदिनिपुर जिला में भी रथ यात्रा के झांकियों को देखा। उन्होंने बताया कि रथ यात्रा के आयोजन में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, इसलिए सरकार ने 60 आयोजकों को प्रत्येक 5 लाख रुपये की नकद सहायता दी है, जिससे पुराने रथों की मरम्मत सम्भव हो सके।
BJP नेताओं की भागीदारी
भाजपा के वरिष्ठ नेता, जैसे मंत्री दिलीप घोश और राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य, ने भी विभिन्न स्थानों पर रथ यात्रा में भाग लिया। उनका सम्मिलित होना इस बात का संकेत है कि धार्मिक उत्सवों में सभी राजनीतिक वर्गों की सहभागिता बढ़ रही है, जिससे सामाजिक सामंजस्य को बल मिलता है।
मध्याह्न भोजन योजना में ISKCON का योगदान
समारोह के दौरान, अधikari ने कहा कि सरकार ने कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का संचालन ISKCON को सौंप दिया है। इस योजना के तहत 1 अगस्त से कोलकत्ता में भोजन वितरण शुरू होगा और बाद में नादिया जिले तक इसका विस्तार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम भ्रष्टाचार के जोखिम को न्यूनतम करेगा, क्योंकि पिछले सरकार में इस योजना में कई विवाद उत्पन्न हुए थे।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
रथ यात्रा का इस साल का स्वरूप न केवल धार्मिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजनीतिक संतुलन को भी दर्शाता है। पूर्व में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस आयोजन में भाग लेकर दिग्बा में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया था, जिससे सामाजिक आलोचना के बावजूद बड़ी जनसंख्या का समर्थन मिला। इस बार भी, मुख्यमंत्री का सक्रिय योगदान और भाजपा नेताओं की भागीदारी यह संकेत देती है कि धार्मिक मंच पर राजनीति का मिश्रण भविष्य में भी जारी रहेगा।