केंद्रीय सरकार ने पुडुचेरी के वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹14,300 करोड़ का वार्षिक बजट मंजूर कर दिया है, लेकिन विधानसभा को कब बुलाया जाएगा, अभी स्पष्ट नहीं है। इस बीच, मुख्य मंत्री एन. रांगासामी ने पहले से ही 5,396 करोड़ की वोट‑ऑन‑अकाउंट खर्च को पूरा कर लिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय सरकार ने पुडुचेरी के FY 2026‑27 बजट में ₹14,300 क्रोड़ की मंजूरी दी।
  • विधानसभा सत्र की तिथि अभी तय नहीं हुई, मुख्य मंत्री से स्पीकर चयन और पोर्टफोलियो आवंटन की अपेक्षा है।
  • बजट अनुमोदन के बाद भी राजनीतिक अस्थिरता विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है।

केंद्रीय सरकार ने पुडुचेरी यूनियन टेरिटरी के वित्तीय वर्ष 2026‑27 के लिए निर्धारित ₹14,300 करोड़ की वार्षिक बजट राशि को औपचारिक रूप से स्वीकृति दे दी है। यह मंजूरी भारत के राष्ट्रपति द्वारा दी गई है, जो गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के समन्वय से प्राप्त हुई।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक माहौल

पुडुचेरी में अगस्त में पूर्ण बजट प्रस्तुत करने की समय‑सीमा थी, लेकिन वर्तमान में सरकार केवल ₹5,396 करोड़ की वोट‑ऑन‑अकाउंट खर्च को पूरा कर रही है, जो मुख्य मंत्री एन. रांगासामी ने फरवरी में पहले एनडीए सरकार के तहत पेश किया था। पिछले विधानसभा चुनावों में एनडीए ने सत्ता फिर से हासिल की, जिससे रांगासामी की अगली अवधि में बजट प्रक्रिया को तेज करने की उम्मीद थी।

बजट अनुमोदन की प्रक्रिया

अगस्त में बजट प्रस्तुत करने की तैयारी के बाद, रांगासामी ने जुलाई की शुरुआत में अपने वित्तीय अनुमान को गृह मंत्रालय को भेजा। 13 जुलाई को गृह मंत्रालय ने पुडुचेरी के मुख्य सचिव को बताया कि राष्ट्रपति ने इस अनुमान को मंजूरी दी है और अब एएफएस (Annual Financial Statement) को विधान सभा में पेश किया जा सकता है। यह कदम वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य‑स्तरीय परियोजनाओं के लिए फंड की उपलब्धता स्पष्ट हो जाती है।

विधान सभा सत्र का अनिश्चित भविष्य

बजट की मंजूरी के बावजूद, विधान सभा को कब बुलाया जाएगा, यह अभी अस्पष्ट है। स्पीकर के चयन और पोर्टफोलियो आवंटन में देरी के कारण मुख्य मंत्री रांगासामी से प्रश्न उठ रहे हैं। भाजपा ने भी इस देरी को लेकर दबाव बनाया है, यह तर्क देते हुए कि सरकार को शीघ्र ही स्पीकर का चुनाव और मंत्रियों को कार्यभार सौंपना चाहिए।

आगे की संभावनाएँ और प्रभाव

यदि बजट सत्र अनिश्चितकाल तक टाला गया, तो विकास परियोजनाओं, विशेषकर बुनियादी ढाँचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में निधि प्रवाह में बाधा आ सकती है। दूसरी ओर, राजनीतिक संघर्ष के समाधान से ही नीति‑निर्माण प्रक्रिया गति पकड़ सकेगी और पुडुचेरी के आर्थिक विकास को गति मिल सकेगी।

सारांश में, बजट मंजूरी एक सकारात्मक कदम है, परंतु राजनीतिक अटकलें और प्रशासनिक देरी राज्य के विकास एजेंडा को जोखिम में डाल सकती हैं।