कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने कहा कि राज्य के सभी 5,927 ग्राम पंचायतों को 15 अगस्त तक "महात्मा गांधी ग्राम पंचायत" के रूप में पुनः नामित किया जाएगा। यह कदम 2026‑27 के बजट में घोषित लक्ष्य के अनुरूप है और राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी के आदर्शों को सुदृढ़ करने का प्रयास है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कर्नाटक के सभी 5,927 ग्राम पंचायतों को 15 अगस्त तक महात्मा गांधी के नाम पर पुनः नामित किया जाएगा।
  • यह निर्णय 2026‑27 राज्य बजट में घोषित लक्ष्य के साथ संरेखित है।
  • राज्य ने केंद्र के VB‑GRAM‑G योजना में गांधी के नाम हटने के जवाब में यह कदम उठाया।

कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने मंगलवार को कहा कि राज्य की सभी 5,927 ग्राम पंचायतों को "महात्मा गांधी ग्राम पंचायत" के रूप में 15 अगस्त से पहले पुनः नामित किया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने पंचायत विकास अधिकारियों (PDOs) के ट्रांसफर काउंसिलिंग कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान की।

पुनः नामकरण का उद्देश्य

खंड्रे ने बताया कि यह कदम 2026‑27 राज्य बजट में महात्मा गांधी के आदर्शों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में रखा गया था। उन्होंने कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरी करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय पृष्ठभूमि और MGNREGA

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का नाम पूर्व यूपीए सरकार ने गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांतों को सम्मानित करने के लिए रखा था। हालांकि, केंद्र ने 1 जुलाई से लागू हुए VB‑GRAM‑G योजना में गांधी का नाम हटाने का आरोप लगाया गया है, जिससे कर्नाटक सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों के नाम में गांधी का प्रीफ़िक्स जोड़ने का निर्णय लिया।

केंद्रीय‑राज्य संवाद

खंड्रे ने हाल ही में आयोजित सभी राज्यों के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्रियों की सम्मेलन में, जो केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के अध्यक्षता में हुआ, सभी 2.68 करोड़ ग्राम पंचायतों को गांधी के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय स्तर पर गांधी के सामाजिक‑आर्थिक विचारों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि यह पहल सफल होती है, तो यह न केवल कर्नाटक में बल्कि पूरे भारत में ग्राम स्तर पर गांधी के विचारों को पुनर्जिवित कर सकती है। यह कदम स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने, पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने और ग्रामीण रोजगार के सुधार में नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है।