कर्नाटक राज्य में आयोजित लोक अदालत ने लगभग 78.78 लाख मामलों को सुलझा कर ₹3,017 करोड़ के विवादों का निपटारा किया। ट्रैफिक चालान पर 50% रियायत और विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों के प्री‑लिटिगेशन मामलों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक लोक अदालत ने 78.78 लाख मामलों को सुलझाया
- समाधान में कुल ₹3,017 करोड़ की राशि जुड़ी
- ट्रैफिक चालान पर 50% रियायत से तेज़ निपटारा संभव हुआ
कर्नाटक राज्य में कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (KSLSA) द्वारा आयोजित व्यापक लोक अदालत ने 78.78 लाख मामलों का निपटारा किया, जिसमें 2,53,290 चल रहे मुकदमे और 76,25,039 प्री‑लिटिगेशन मामलों शामिल थे। यह मंच, जो वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) का एक प्रमुख उदाहरण है, ने कुल ₹3,017 करोड़ के वित्तीय विवादों को समाप्त किया।
पृष्ठभूमि और महत्व
लोक अदालत भारत के न्यायिक प्रणाली में एक वैकल्पिक, कम लागत वाला मंच है, जिसका उद्देश्य न्याय तक पहुँच को तेज़ और सुलभ बनाना है। कर्नाटक में इस पहल की शुरुआत 2000 के दशक में हुई, लेकिन इस बार के आयोजन में विशेष रूप से ट्रैफ़िक चालान, मोटर वाहन दुर्घटना (MVC) और चेक बाउंस मामलों को प्राथमिकता दी गई।
ट्रैफ़िक चालान पर 50% रियायत
KSLSA के सुझाव पर राज्य सरकार ने 2019‑2026 के बीच जारी 5.05 करोड़ ट्रैफ़िक चालानों में से 19.13 लाख मामलों को प्री‑लिटिगेशन चरण में सुलझाया। इस प्रक्रिया में 50% रियायत के कारण नागरिकों के लिए जुर्माना भुगतान आसान हो गया, जिससे लगभग ₹55 करोड़ की राशि एकत्र हुई और न्यायालयों का बोझ घटा।
अन्य प्रमुख श्रेणियाँ
मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में 4,496 केसों का निपटारा हुआ, जिससे लगभग ₹278.86 करोड़ के नुकसान का समाधान हुआ। नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत 10,817 चेक बाउंस मामलों ने ₹374.39 करोड़ की राशि को हल किया। इसके अलावा 3,590 विभाजन मुकदमे, 1,948 वरिष्ठ नागरिक मामलों और उपभोक्ता व RERA संबंधी विवादों को भी सफलतापूर्वक निपटाया गया।
आगे की योजना
जज अनू शिवरमन ने कहा कि चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन शनिवार को होगा, जिसमें 4.52 लाख लंबित मामलों में से 64,191 मामलों को सुलझाने की आशा है। यह कदम कर्नाटक में वैकल्पिक विवाद समाधान की पहुँच को और गहरा करेगा।