केनगरी पुलिस ने आदिचुंचनागिरी शिक्षा ट्रस्ट के 6 एकड़ जमीन को 100 करोड़ रुपये के लेन‑देने में जड़ता लाने की कोशिश करने वाले 11 लोगों को जाँच के बाद हिरासत में ले लिया। उन्होंने नकली वंशावली, मृत्यु प्रमाणपत्र और राजस्व दस्तावेज़ तैयार किए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केनगरी पुलिस ने 11 आरोपियों को जाँच के बाद हिरासत में लिया।
  • नकली दस्तावेज़ों से 6 एकड़ भूमि पर 100 करोड़ रुपये का झूठा दावा किया गया।
  • आरोपी में राजस्व अधिकारी और गाँव के प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

बेंगलुरु के केनगरी थाने ने 11 व्यक्तियों, जिनमें राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं, को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने आदिचुंचनागिरी शिक्षा ट्रस्ट की 6 एकड़ जमीन पर 100 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ जाल बुनने की कोशिश की। यह मामला 14 जुलाई, 2026 को प्रकाशित हुआ, जब पुलिस ने एक विस्तृत जाँच के बाद इस बड़े पैमाने पर ज़मीनी धोखाधड़ी को उजागर किया।

पृष्ठभूमि और विवादित भूमि

कंबिपुरा गांव, केनगरी होबली, बेंगलुरु दक्षिण तालुका में स्थित यह जमीन, 45 एकड़ के बड़े भू‑खंड का हिस्सा है (सर्वे नंबर 43)। ट्रस्ट ने इस क्षेत्र को शैक्षिक संस्थानों के विस्तार के लिए सुरक्षित रखा था, जबकि आसपास के कई बार भूमि‑संबंधी विवादों की खबरें आती रहती हैं। इस भूमि पर झूठी वंशावली, मृत्युपत्र और अनुदान प्रमाणपत्र बनाकर मालिकाना हक़ का दावा करने की योजना बनाई गई थी।

जांच और कानूनी कदम

ट्रस्ट के सचिव ने 10 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद केनगरी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 के कई धारा (318(4), 319(2), 336(2), 336(3), 329(3), 340(2) और 351(2)) के तहत मामला दर्ज किया। जाँच के दौरान यह पता चला कि निजी व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के बीच एक साजिश चल रही थी, जिसके तहत आधिकारिक दस्तावेज़ों को बनावटी रूप में तैयार किया गया और भूमि की अवैध परिवर्तन (म्यूटेशन) को संभव बनाने की कोशिश की गई।

गिरफ्तार और आगे की कार्यवाही

गिरफ्तार व्यक्तियों में फ्रांसिस, रोग्यस्वामी, श्रीनिवास, नरेंद्र कुमार, जोसेफ, दीपक (उप तहसिलदार), एम.पी. रवि, कiran कुमार (राजस्व निरीक्षक), अरुण कुमार (राजस्व निरीक्षक), शिवप्रसाद (ग्राम प्रशासनिक अधिकारी) और सतिश कुमार (ग्राम प्रशासनिक अधिकारी) शामिल हैं। सभी को न्यायालय में पेश किया गया और ज्यूडिशियल कस्टडी में रख दिया गया। प्रमुख आरोपी रोग्यस्वामी को अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर नकली दस्तावेज़ तैयार करने और भूमि की अवैध म्यूटेशन को अंजाम देने का आरोप है।

भविष्य की संभावनाएँ और प्रभाव

जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि वही साजिश बेंगलुरु के आसपास के अन्य संपत्तियों पर भी लागू हो सकती है। पुलिस ने इस संभावित नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ने के लिए अतिरिक्त जांच शुरू कर दी है। यदि सफल रहती है, तो यह केस राज्य‑स्तर पर भूमि‑संबंधी भ्रष्टाचार को रोकने और ट्रस्ट‑संबंधी संपत्तियों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।