सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के अपने आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में राज्य अधिकारियों की देरी को देखते हुए कहा कि केवल तब ही बुलडोज़र का प्रयोग उचित होगा, जब नगरपालिका और अवैध अतिक्रमणकारियों के बीच का ‘सुविधाजनक भ्रष्टाचार’ न्याय के सिद्धांत को बाधित करे। कोर्ट ने मामलों को हाई कोर्टों में भेजने का निर्देश दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोज़र के प्रयोग को केवल तब मान्य माना है जब नियम‑कानून की गंभीर उल्लंघन हो।
  • 2024 के न्यायालय के आदेश को लागू करने में राज्य‑स्तरीय देरी को हाई कोर्टों में सुलझाने का निर्देश दिया गया।
  • जजों ने तथ्य‑आधारित जांच की महत्ता पर बल दिया, जिससे ‘बुलडोज़र जस्टिस’ का दुरुपयोग रोका जा सके।

नई दिल्ली – 17 जुलाई, 2026 को एक तीन‑जज की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि बुलडोज़र को तभी प्रयोग किया जाएगा जब नगरपालिका अधिकारियों और अवैध अतिक्रमणकारियों के बीच का ‘सुविधाजनक भ्रष्टाचार’ नियम‑कानून को बाधित करे। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा दी गई, जो 13 नवंबर 2024 के अपने निर्णय के बाद जारी की गई थी, जिसमें कहा गया था कि केवल आरोप के आधार पर घरों को ध्वस्त करना ‘बुलडोज़र जस्टिस’ के नाम पर लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

पृष्ठभूमि और 2024 का निर्णय

2024 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब तक कोई कानूनी प्रक्रिया, अनुमति या अदालत का आदेश न हो, तब तक बुलडोज़र का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इस निर्णय के बाद कई राज्य सरकारों ने अतिक्रमण के चलते घरों को ध्वस्त करने के लिए बुलडोज़र का प्रयोग किया, जिससे न्यायिक आदेश की अवहेलना का आरोप लगा। कोर्ट ने तब से यह संदेश देना चाहा कि ‘न्याय के नाम पर बल’ नहीं, बल्कि ‘न्याय के नियमों के अनुसार बल’ ही वैध है।

अदालत का वर्तमान रुख

जज जॉयमाल्या बागची और वी मोहना ने याचिकाकर्ताओं को बताया कि उनके अनुरोध तथ्य‑आधारित प्रश्नों पर आधारित हैं, जिन्हें उच्च न्यायालयों में जांचना आवश्यक है। अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी कहा कि प्रत्येक राज्य‑स्तर की शिकायत में वैध तथ्यात्मक जांच की जरूरत होगी, जिससे अदालत का समय बचाया जा सके और न्याय के सच्चे मूल सिद्धांतों को बनाए रखा जा सके।

प्रभाव और आगे का रास्ता

इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘बुलडोज़र जस्टिस’ को एक साधन नहीं बल्कि एक अपवाद बना दिया है, जहाँ केवल तब ही बल प्रयोग किया जाएगा जब भ्रष्टाचार की जड़ें न्यायिक प्रणाली को हिला दें। यह दिशा-निर्देश न केवल राज्य अधिकारियों को सतर्क करेगा, बल्कि भविष्य में अतिक्रमण‑विरोधी नीतियों को कानूनी ढाँचे में लाने की प्रेरणा देगा।

जज बागची ने कहा, “न्याय के सिद्धांत को समझते हुए ही बुलडोज़र का प्रयोग होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत या राजनीतिक लक्ष्यों के लिए।” इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों की प्रभावशीलता को उच्च न्यायालयों के माध्यम से सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है।