मनिपुर में दो घातक हमलों के बाद, CRPF को बख्तरबंद गाड़ियों में ही चलने और अचानक तैनाती से बचने का निर्देश मिला है। आधिकारिक स्रोत ने बताया कि हथियारधारी दुश्मन को तुरंत गिरफ्तार या गोली मार कर निडर किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- CRPF को बख्तरबंद वाहन में ही चलने का आदेश
- अचानक तैनाती से बचने की रणनीति अपनाई जाएगी
- हथियारधारी दुश्मन को आत्मसमर्पण न करने पर गोलीबारी का अधिकार
मनिपुर में हाल ही में दो घातक हमलों ने सुरक्षा तंत्र को पुनः जांचने पर मजबूर कर दिया। असम राइफल्स के दो बटालियन पर घात लगने के बाद, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फोर्स (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि अब सभी ऑपरेशनों में केवल बख्तरबंद वाहन ही उपयोग किए जाएंगे और अचानक या बिना योजना के तैनाती से पूरी तरह बचा जाएगा।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
जून 2026 में, CRPF ने उत्तर‑पूर्वी राज्य में दो कोबरा (CoBRA) बटालियन को तैनात किया, जो विशेष रूप से माओवादी विरोधी अभियानों के लिए गठित इकाई है। ये बटालियन अब मनिपुर के उख्रुल, चुराचंदपुर और कंगपोकी जैसे पहाड़ी जिलों में तैनात होने की संभावना है, जहाँ कुकि‑ज़ो और नागा समुदायों के बीच तनाव तीव्र है। राज्य में कुल मिलाकर 20,000 CRPF कर्मी, 10,000 बीएसएफ और 26,000 असम राइफल्स एवं भारतीय सेना के जवान मौजूद हैं।
नई निर्देशावली के प्रमुख बिंदु
सरकारी अधिकारी ने बताया कि "हथियारधारी कुख्यात व्यक्तियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा, और यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते तो गोली मार दी जाएगी"। साथ ही, भीड़ प्रबंधन प्रशिक्षण को भी बख्ती किया गया है, क्योंकि सुरक्षा अभियानों के दौरान अक्सर स्थानीय महिलाओं द्वारा बाधा उत्पन्न की जाती है। यह कदम स्थानीय जनसंख्या के साथ तनाव को कम करने और अधिक सटीक, नियंत्रित ऑपरेशनों को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
एथनिक टकराव का विस्तार
कुकी और मेइती समुदाय के बीच चल रहा संघर्ष अब कुकी और नागा समूहों तक फैला है। फरवरी 2024 में उख्रुल में हुई टकराव में कुख्यात टॉर्च‑लाइट घटना के बाद हिंसा तेज हुई, जिससे कई मौतें और बंधक बनना शामिल है। इस हिंसा ने 2023 में शुरू हुए एथनिक हिंसा को और बढ़ा दिया, जिसके परिणामस्वरूप अब तक लगभग 300 लोग मारे जा चुके हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
बख्तरबंद वाहनों की बढ़ती संख्या (पिछले दो महीनों में 100 से अधिक) और कोबरा बटालियन की तैनाती से उम्मीद है कि CRPF सुरक्षा ऑपरेशनों में अधिक सटीकता और कम नागरिक हानि हासिल करेगा। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि केवल तकनीकी उपायों से एथनिक तनाव को समाप्त नहीं किया जा सकता; दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद आवश्यक रहेगा।