कैंसर सर्वाइवर सोनाली बेंद्रे ने अपनी जीवनशैली और उपवास के बारे में खुलासा किया है, जिससे विशेषज्ञों के बीच पोषण और रिकवरी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे 18-20 घंटे का उपवास करती हैं और दिन में केवल 1.5 बार भोजन करती हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर सर्वाइवर्स के लिए लंबे समय तक उपवास करना जोखिम भरा हो सकता है।
- रिकवरी के लिए पर्याप्त प्रोटीन, कैलोरी और विटामिन का सेवन अनिवार्य है।
- कोई भी डाइट प्लान अपनाने से पहले ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह लेना आवश्यक है।
बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, जिन्होंने स्टेज IV मेटास्टैटिक कैंसर जैसी गंभीर चुनौती का डटकर सामना किया है, हाल ही में अपनी जीवनशैली और खान-पान की आदतों को लेकर चर्चा में हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने खुलासा किया कि वे अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम के साथ-साथ 18 से 20 घंटे का उपवास (Intermittent Fasting) करती हैं। बेंद्रे ने बताया कि वे दिन में केवल डेढ़ बार ही भोजन करती हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: रिकवरी बनाम उपवास
सोनाली बेंद्रे के इस खुलासे ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने और सूजन कम करने में मदद कर सकती है, वहीं कैंसर सर्वाइवर्स के लिए यह मामला काफी जटिल है। TGH ऑनको लाइफ कैंसर सेंटर की कंसल्टेंट रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. ज्योति मेहता ने चेतावनी दी है कि कैंसर सर्वाइवर्स को अपनी डाइट को लेकर बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स की ऑनको-सर्जन डॉ. मेघल संघवी का कहना है कि कैंसर के बाद पोषण की ज़रूरतें व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक उपवास करने से शरीर में प्रोटीन और कैलोरी की कमी हो सकती है, जिससे मांसपेशियों का नुकसान (muscle loss) और थकान हो सकती है। रिकवरी के दौरान शरीर को ऊतकों की मरम्मत और प्रतिरक्षा प्रणाली (immunity) को मजबूत करने के लिए निरंतर पोषण की आवश्यकता होती है।
पोषण का सही संतुलन क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बाद मुख्य लक्ष्य 'भूखा रहना' नहीं बल्कि 'शक्ति प्राप्त करना' होना चाहिए। KIMS हॉस्पिटल्स की मुख्य आहार विशेषज्ञ अमरीन शेख के अनुसार, रिकवरी के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और खनिज लेना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति उपवास करना चाहता है, तो उसे अपने ऑन्कोलॉजिस्ट और डाइटिशियन की कड़ी निगरानी में ही ऐसा करना चाहिए।
अंततः, विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' दृष्टिकोण कैंसर रिकवरी में काम नहीं आता। प्रत्येक व्यक्ति की पोषण संबंधी आवश्यकताएं उनके कैंसर के प्रकार, उपचार के चरण और शारीरिक बनावट के आधार पर भिन्न होती हैं।