डायनासोर के साथ 6.6 करोड़ वर्ष पहले विलुप्त मानी जाने वाली प्रागैतिहासिक मछली 'सीलाकैंथ' (Coelacanth) की पुनर्खोज ने विकासवादी इतिहास और गहरे समुद्र के जीव विज्ञान के बारे में हमारे ज्ञान को चुनौती दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सीलाकैंथ (Coelacanth) को 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर के साथ ही विलुप्त मान लिया गया था।
  • साल 1938 में दक्षिण अफ्रीका के तट पर इसके जीवित मिलने से पूरी दुनिया का वैज्ञानिक समुदाय हैरान रह गया था।
  • इस 'जीवित जीवाश्म' के रूप में प्रसिद्ध मछली से पानी से जमीन पर जीवन के विकास के इतिहास को समझने में मदद मिलती है।

वैज्ञानिक खोजों के इतिहास में शायद ही कोई ऐसी घटना होगी जिसने सीलाकैंथ (Coelacanth) मछली की पुनर्खोज जितनी सनसनी मचाई हो। दशकों तक, जीवाश्म वैज्ञानिक और विकासवादी जीवविज्ञानी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे कि यह प्राचीन, लोब-फिन वाली मछली लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से गायब हो गई थी, जो उसी विनाशकारी क्षुद्रग्रह (Asteroid) के प्रभाव का शिकार हुई थी जिसने डायनासोरों का अंत किया था। हालांकि, समुद्र की गहराइयों ने एक ऐसा रहस्य छुपा रखा था जिसने इतिहास की किताबों को फिर से लिखने पर मजबूर कर दिया।

1938 की वह चौंकाने वाली खोज

वैज्ञानिकों का यह भ्रम 22 दिसंबर 1938 को उस समय टूट गया, जब दक्षिण अफ्रीका के ईस्ट लंदन में एक संग्रहालय की क्यूरेटर मार्जोरी कोर्टने-लैटिमर (Marjorie Courtenay-Latimer) को एक स्थानीय मछुआरे के जाल में फंसी एक अजीब नीली मछली मिली। इस मछली के पंख (Fins) हाथ-पैर जैसे दिख रहे थे। इसकी विशिष्टता को पहचानते हुए, उन्होंने प्रसिद्ध रसायनशास्त्री और मत्स्य विज्ञानी जे.एल.बी. स्मिथ (J.L.B. Smith) से संपर्क किया। स्मिथ ने इस जीव की पहचान एक जीवित सीलाकैंथ के रूप में की, जो जीव विज्ञान के इतिहास में किसी जीवित डायनासोर को जंगल में घूमते हुए देखने के बराबर था।

विकासवाद का एक जीवंत दस्तावेज

सीलाकैंथ को अक्सर "जीवित जीवाश्म" (Living Fossil) कहा जाता है क्योंकि इसकी शारीरिक संरचना लाखों वर्षों से लगभग अपरिवर्तित रही है। यह मछली 'लोब-फिन्ड' (Lobe-finned) प्रजाति से संबंधित है, जिसके पंख चार पैरों वाले थलीय जानवरों की तरह चलते हैं। यह अनोखी शारीरिक विशेषता दर्शाती है कि सीलाकैंथ का उन प्रागैतिहासिक जीवों से गहरा विकासवादी संबंध है जिन्होंने सबसे पहले पानी से निकलकर जमीन पर कदम रखा था।

गहरे समुद्र के रहस्य और संरक्षण की जरूरत

बाद के अभियानों से पता चला कि सीलाकैंथ पूरी तरह से विलुप्त नहीं हुई थी, बल्कि पश्चिमी हिंद महासागर और इंडोनेशिया के पास गहरे, ज्वालामुखीय पानी में जीवित बची हुई थी। ये रहस्यमयी जीव 100 से 500 मीटर की गहराई में, पानी के नीचे बनी गुफाओं में रहते हैं। लाखों वर्षों तक जीवित रहने के बाद, आज यह मछली गहरे समुद्र में होने वाले व्यावसायिक शिकार, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण खतरे में है। समुद्री जीवविज्ञानी चेतावनी देते हैं कि इन प्राचीन जीवों का संरक्षण हमारे अपने अस्तित्व और विकास के इतिहास को समझने के लिए बेहद जरूरी है।