स्पेस विभाग ने गैगनयान और अन्य रणनीतिक मिशनों से वैज्ञानिकों की बार-बार इस्तीफा को रोकने हेतु नई आंतरिक निर्देश जारी किए हैं। इस कदम से पिछले कुछ महीनों में 100‑120 कर्मचारियों के प्रस्थान को नियंत्रित करने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • स्पेस विभाग ने गैगनयान जैसे प्रमुख मिशनों से जुड़ी रेज़िग्नेशन पर नई प्रतिबंधात्मक नीति लागू की।
  • कम से कम 100‑120 वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस्तीफा दिया, जिससे परियोजनाओं की निरंतरता पर चिंता बढ़ी।
  • 2020 के नियम को उलटते हुए अब सभी अनुरोधों को विभागीय स्तर पर समीक्षा के लिये भेजा जाएगा।

बेंगलुरु: भारत के अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के विभाग‑ऑफ़‑स्पेस (DoS) ने एक नया आंतरिक मेमो जारी किया है, जिसका उद्देश्य गैगनयान, चंद्रयान‑3 और अन्य राष्ट्रीय महत्व के मिशनों में कार्यरत वैज्ञानिकों के बार‑बार इस्तीफा को रोकना है। 14 जुलाई को जारी इस मेमो में कहा गया है कि ‘ग्रुप‑ए’ वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या इस्तीफा के अनुरोध अब सामान्य प्रक्रिया नहीं रहेंगे, और सभी मामलों को DoS को भेजा जाएगा।

पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

ISRO के कुल 14,600+ कर्मचारियों में से केवल कुछ ही प्रतिशत ही इस नई नीति के तहत आए हैं, परन्तु ये निकासी प्रमुख केंद्रों – यूआरएससी (URSC) और वीएसएससी (VSSC) – से आई हैं। कई स्रोतों ने बताया कि URSC से अकेले लगभग 80 और VSSC से 20 से अधिक वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया, जिससे कुल संख्या 120 के करीब पहुँच सकती है। इस निकासी में ल्यूमिनस प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जॉसेफ और स्पाडेक्स प्रोजेक्ट के प्रमुख जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

नए नियमों की प्रमुख धाराएँ

मेमो में स्पष्ट किया गया है कि “गैगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के रेज़िग्नेशन को रूटीन मानकर स्वीकार नहीं किया जाएगा।” केंद्र निदेशकों को निर्देश दिया गया है कि वे इन अनुरोधों को स्वीकृति न दें, बल्कि अपने सिफ़ारिशों सहित DoS को भेजें, जहाँ अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह 2020 के उस मेमो को उलटता है, जिसमें केंद्र निदेशकों को ‘ग्रुप‑ए’ वैज्ञानिकों के रिटायरमेंट एवं रेज़िग्नेशन को स्वीकृति देने की शक्ति दी गई थी।

इतिहास और भविष्य की चुनौतियाँ

ISRO में कर्मचारियों का बदलना नई बात नहीं है। 2004‑2007 में लगभग आधे नए भर्ती हुए कर्मचारी छोड़ चुके थे, और 2012‑2024 के बीच लगभग 700 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया। 2025‑26 के वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि 1,050 वैज्ञानिक‑तकनीकी पदों की भर्ती प्रगति पर है, जबकि 466 प्रोजेक्ट पदों को नियमित किया गया और 460 उच्च‑ग्रेड पद बनाए गए। हालांकि, अनुभवी वैज्ञानिकों को प्रतिस्थापित करना, विशेषकर राष्ट्रीय मिशनों में, केवल भर्ती से हल नहीं हो सकता।

प्रभाव और आगे का मार्ग

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि “कर्मचारी बदलना किसी भी संस्था का सामान्य हिस्सा है, परंतु महत्वपूर्ण मिशनों की निरंतरता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” इस नीति के माध्यम से विभाग का लक्ष्य यह है कि प्रमुख मिशनों में तकनीकी ज्ञान का नुकसान न हो और समय‑सीमा पर प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिकों की असंतुष्टि को संबोधित नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की निकासी फिर से बढ़ सकती है, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं पर असर पड़ सकता है।