भारतीय‑अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने रूस के सोयुज़ MS‑29 के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर पहला कदम रखा। लगभग आठ महीने की यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए नई तकनीकों को परीक्षण करने पर केंद्रित होगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अनिल मेनन ने सोयुज़ MS‑29 के साथ अपने पहले अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत की।
  • मिशन में आठ महीने तक ISS पर वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी प्रदर्शनों का संचालन होगा।
  • अमेरिका‑रूस के बीच अंतरिक्ष सहयोग तनाव के बावजूद जारी है।

रूस की बायकोनूर कोसमोड्रोम से सोयुज़ MS‑29 के सफल प्रक्षेपण ने अंतरिक्ष में भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचाया। यह यात्रा न केवल मेनन के लिए पहला अंतरिक्ष मिशन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण भी है, जहाँ अमेरिकी नासा और रूसी रोसकोसमोस् ने मिलकर इस महत्त्वपूर्ण उड़ान को संभव बनाया।

लॉन्च और टीम का परिचय

22 जुलाई 2026 को, मेनन ने रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ सोयुज़ कोबोर्ड किया। लॉन्च के लगभग तीन घंटे बाद अंतरिक्ष यान ने ISS से डॉकिंग की, जहाँ वे एक्सपेडिशन 74 और 75 के मौजूदा क्रू के साथ शामिल हुए। इस मिशन में नासा के जेसीका मेयर, जैक हाथवे और क्रिस विलियम्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की सोफी एडेनॉट, तथा रोसकोसमो के कई अनुभवी कॉस्मोनॉट शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई दिशा

नासा प्रशासक जेरड इसाकमैन ने बायकोनूर में लांच को देखा, जो पिछले आठ वर्षों में नासा प्रमुख की पहली यात्रा थी। इसाकमैन ने रोसकोसमो के प्रमुख दिमित्री बाकानोव के साथ सहयोग की सराहना करते हुए कहा, “पिछले महीनों में किया गया एकीकृत काम सभी पक्षों की पेशेवरता और समर्पण को दर्शाता है।” यूक्रेन में रूस के युद्ध के बावजूद, दोनों महाशक्तियों ने ISS मिशनों में सहयोग जारी रखा है, जो अंतरिक्ष में शांति और विज्ञान को प्राथमिकता देता है।

अनिल मेनन का पृष्ठभूमि

49‑वर्षीय मेनन का जन्म मिनियापोलिस में भारतीय‑यूक्रेनी माता‑पिता के घर हुआ। उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन में आपातकालीन चिकित्सा, अमेरिकी एयर फोर्स में सेवा, और बाद में यू.एस. स्पेस फोर्स में कर्नल के रूप में करियर बनाया। 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में चयनित होने से पहले, मेनन स्पेसएक्स में प्रथम फ्लाइट सर्जन के रूप में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए चिकित्सा समर्थन प्रदान किया।

ISS पर वैज्ञानिक कार्य

आगामी आठ महीने के दौरान मेनन माइक्रोग्रैविटी में अर्द्धचालक क्रिस्टल निर्माण, रक्त परिसंचरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता‑सहायता वाली अल्ट्रासाउंड चिकित्सा, और संवर्धित वास्तविकता के माध्यम से बायो‑प्रिंटिंग जैसी प्रयोगों को आगे बढ़ाएंगे। ये प्रयोग न केवल भविष्य में लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के लिए ज्ञान प्रदान करेंगे, बल्कि पृथ्वी पर स्वास्थ्य और सामग्री विज्ञान में भी प्रत्यक्ष लाभ देंगे।