हैदराबाद के मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमथी ने 'मी सुरक्षा – सहचारी' कार्यक्रम के तहत 3,000 स्व-सहायता समूह (SHG) महिलाओं को कानूनी अधिकार, साइबर सुरक्षा और आपराधिक रोकथाम के प्रशिक्षण से सशक्त बनाया। यह पहल महिलाओं को सामुदायिक सुरक्षा में भागीदार बनाने और पुलिस-समुदाय संबंध मजबूत करने का लक्ष्य रखती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ‘सहचारी’ पहल ने 3,000 SHG महिलाओं को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया।
  • कार्यक्रम में महिलाओं को कानूनी अधिकार, साइबरक्राइम, और पीडित सहायता के बारे में जागरूक किया गया।
  • पुलिस-समुदाय सहभागिता से अपराध रिपोर्टिंग और रोकथाम में सुधार की उम्मीद।

हैदराबाद के मलकाजगिरी ज़ोन में पुलिस कमिश्नर बी. सुमथी ने मंगलवार को इम्पीरियल गार्डन, बॉवेनपली में ‘मी सुरक्षा – सहचारी’ (Mee Suraksha – Sahachari) नामक सामुदायिक पुलिसिंग पहल का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम MEPMA (Mission for Elimination of Poverty in Municipal Areas) और SERP (Society for Elimination of Rural Poverty) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें मलकाजगिरी, एल.बी. नगर, और उप्पाल क्षेत्रों की स्व‑सहायता समूहों (SHG) की लगभग 3,000 महिलाओं ने भाग लिया।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य

समुदाय सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका को पहचाना गया है, विशेषकर जब अपराध की रिपोर्टिंग अक्सर महिलाओं से जुड़ी होती है। ‘सहचारी’ पहल का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों, और पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले समर्थन सेवाओं से परिचित कराना है। इस पहल के तहत महिला एवं बाल संरक्षण, साइबर‑क्राइम रोकथाम, नशा‑मुक्ति, और पीडित सहायता जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु

शिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों को POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act और NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) Act जैसी प्रमुख विधियों की जानकारी दी गई। साथ ही ‘भरोसा सेंटर’, ‘SHE टीम’, और महिला पुलिस स्टेशन जैसे संस्थानों के कार्यप्रणाली, कानूनी सहायता, पुनर्वास और पीड़ित समर्थन सेवाओं की भी विस्तृत चर्चा की गई। महिलाओं को आपातकालीन प्रतिक्रिया, स्थानीय स्तर पर अपराध रिपोर्टिंग, और अपने समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

भविष्य की दिशा

कमिश्नर सुमथी ने कहा, “प्रभावी पुलिसिंग के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है; ‘सहचारी’ इस सहयोग को मजबूत करेगा, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में सुधार लाएगा और अपराध रिपोर्टिंग को आसान बनाएगा।” MEPMA के अतिरिक्त मिशन निदेशक एन. यडागिरी राव ने भी SHG सदस्यों को मासिक बैठकों में सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने और जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।

यह पहल न केवल महिलाओं को सशक्त बनाती है, बल्कि पुलिस-समुदाय विश्वास को भी गहरा करती है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा और अपराध नियंत्रण में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।