बेंगलुरु में बल्क वेस्ट जनरेटर्स को वेंडरों की मनमानी से राहत मिलने की उम्मीद है। मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कचरा संग्रहण के लिए नए वेंडरों को पैनल में शामिल करने का आश्वासन दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बेंगलुरु में वर्तमान में केवल पांच कंपनियां बल्क वेस्ट कलेक्शन के लिए सूचीबद्ध हैं, जिससे एकाधिकार की स्थिति बनी है।
- नागरिकों ने आरोप लगाया है कि सूचीबद्ध वेंडरों द्वारा ₹12 प्रति किलो तक का अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
- विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने अधिक वेंडरों को पैनल में शामिल करने का वादा किया है ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।
- नए वेंडरों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे लागू होने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं।
बेंगलुरु के बल्क वेस्ट जनरेटर्स (बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थान और अपार्टमेंट) के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कर्नाटक के विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने शहर में कचरा संग्रहण वेंडरों के मौजूदा एकाधिकार को समाप्त करने का महत्वपूर्ण आश्वासन दिया है। वर्तमान में, बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) ने केवल पांच कंपनियों को सूचीबद्ध किया है, जिससे प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में केवल एक ही वेंडर उपलब्ध है।
एकाधिकार और बढ़ते खर्च का संकट
बेंगलुरु के नागरिकों और बड़े कचरा उत्पादकों ने लंबे समय से शिकायत की है कि वेंडरों के पास विकल्प न होने के कारण वे अत्यधिक शुल्क देने को मजबूर हैं। वर्तमान में, सूचीबद्ध वेंडरों द्वारा ₹12 प्रति किलोग्राम तक का शुल्क लिया जा रहा है, जबकि निजी वेंडरों के दौर में यह दर काफी कम हुआ करती थी। नागरिकों का तर्क है कि 'मोलभाव' (bargaining) का विकल्प केवल कागजों पर है, क्योंकि जब क्षेत्र में केवल एक ही वेंडर उपलब्ध हो, तो प्रतिस्पर्धा का अभाव रहता है।
सरकार का रुख और भविष्य की योजना
मंत्री गौड़ा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने ₹12 प्रति किलो को अधिकतम सीमा के रूप में तय किया है, लेकिन उन्होंने वेंडरों को ₹8 प्रति किलो के आसपास शुल्क लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नए वेंडरों की संख्या नहीं बढ़ती, तब तक कीमतों में वास्तविक कमी आना कठिन है। BSWML के सूत्रों के अनुसार, नए वेंडरों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन मौजूदा अनुबंधों की समाप्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण इसे पूरी तरह लागू होने में तीन महीने का समय लग सकता है।
पर्यावरण और स्वच्छता के लिए निर्देश
मंत्री ने बल्क जनरेटर्स को सख्त चेतावनी भी दी है कि वे गैर-सूचीबद्ध (non-empanelled) वेंडरों को कचरा न सौंपें। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अनधिकृत वेंडर शुल्क तो ले लेते हैं, लेकिन कचरे का उचित प्रसंस्करण (processing) नहीं करते, जिससे अंततः कचरा सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर जमा हो जाता है। वर्तमान में, जनरेटर्स के पास तीन विकल्प हैं: सूचीबद्ध वेंडरों को देना, स्वयं प्रसंस्करण करना, या सीधे BSWML को ₹12 प्रति किलो पर कचरा देना।