बेंगलुरु में NIA की विशेष अदालत ने मोहम्मद हनीफ़ खान को सात साल की कड़ी जेल और ₹48,000 जुर्माने की सजा सुनाई। यह अल‑हिंद ISIS साजिश में पहला दोषी सिद्ध हुआ, जबकि कुल 20 अभियुक्तों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मोहम्मद हनीफ़ खान को सात साल की कठोर कारावास की सजा मिली
  • साज़िश का लक्ष्य भारत में ISIS प्रांत स्थापित करना था
  • NIA ने अभी भी ऑनलाइन हैंडलर की पहचान की तलाश जारी रखी है

बेंगलुरु (बेंगलुरु) – 14 जुलाई, 2026 – राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की बेंगलुरु विशेष अदालत ने अल‑हिंद ISIS साजिश केस में पहले अभियुक्त मोहम्मद हनीफ़ खान को सात साल की कड़ी कैद और ₹48,000 जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा 2020 में दर्ज हुए बड़े आतंकवादी साजिश के तहत पहली सजा है, जिसमें अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पृष्ठभूमि और जांच का विवरण

2020 में करनाटक पुलिस ने बेंगलुरु में इस साजिश को दर्ज किया, जिसके बाद NIA ने मामला अपने हाथों में ले लिया। एजेंसी के अनुसार, हनीफ़ एक सर्वेक्षण टीम का हिस्सा था, जिसने शिवनासमुद्रा (चमराजनगर) और गुंडलुपेट में घने जंगलों का निरीक्षण कर ISIS के प्रशिक्षण शिविर और छिपने के स्थान पहचानें। इस साजिश का मकसद भारत में एक नया ISIS प्रांत स्थापित करना था।

मुख्य अभियोजक और साजिश का विस्तार

साजिश का प्रमुख आरोपी मेहबूब पाशा को मुख्य दिमाग माना गया। पाशा ने बेंगलुरु के गुरुप्पनापलिया में अपने घर में कई बैठकों का आयोजन किया, जहाँ लक्षित हत्याओं से सामुदायिक दंगे उकसाने और ISIS के प्रतिबंधित एजेंडा को आगे बढ़ाने की योजना बनायी गई। investigators ने यह भी पाया कि पाशा ने हनीफ़ को दो पिस्तोल और 60 ज़िंदा गोलाबारी के राउंड प्रदान किए थे, ताकि वे हिंसक कृत्यों को अंजाम दे सकें।

आपराधिक गतिविधियों का विस्तार

हनीफ़ ने कई अन्य अभियुक्तों को बेंगलुरु से पश्चिम बंगाल तक किराए की कार में ले जाकर साजिश में सहयोग किया। NIA ने आरोप लगाया कि पाशा और उनके सहयोगियों ने हथियार और विस्फोटक पदार्थों की तस्करी करके ISIS की गतिविधियों को बढ़ावा दिया। इस केस में अभी भी एक ऑनलाइन हैंडलर की पहचान की खोज जारी है, जो इस मॉड्यूल की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाता माना जाता है।

भविष्य की कार्यवाही और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

सजाए गए हनीफ़ के अलावा, अभी भी कई अभियुक्तों को मुकदमा चलाने की प्रक्रिया में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सजा से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की तीव्र कार्रवाई का संदेश जाता है और भविष्य में इस प्रकार की साजिशों को रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यह केस भारत में ISIS‑संबंधित नेटवर्क की जटिलता और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के प्रति सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करता है।