दस्तावेज़ों से पता चला कि फरवरी 2026 में S192 सिग्नल 50 से अधिक बार खराब हुआ। अंबट्टूर स्टेशन मास्टर के कार्यालय में लगे बज़र को डिस्कनेक्ट किया गया, जिससे कर्मचारियों को चेतावनी नहीं मिली। तकनीकी कर्मियों ने मूल कारण की जांच किए बिना बार‑बार रीसेट किया, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- S192 सिग्नल फरवरी 2026 में 50+ बार फेल हुआ
- अंबट्टूर स्टेशन में चेतावनी बज़र डिस्कनेक्ट था
- मूल कारण विश्लेषण के बिना बार‑बार रीसेट से सुरक्षा जोखिम बढ़ा
दक्षिण भारत के चेन्नई रेलवे डिवीजन में अंबट्टूर‑आवाड़ी सेक्शन में एक इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) ने दो अन्य ट्रेनों द्वारा कब्ज़ा किए गए ट्रैक पर प्रवेश किया, लेकिन चालक ने समय पर ब्रेक लगाकर टकराव को टाला। यह घटना 5 मार्च 2026 को घटी, लेकिन इसके पीछे की प्रणालीगत त्रुटियों की जांच अभी-अभी शुरू हुई।
सिग्नल विफलता के आँकड़े
हिंदु द्वारा प्राप्त दस्तावेज़ों में बताया गया है कि S192 स्वचालित सिग्नल केवल फरवरी 2026 में ही 53 बार फेल हुआ। यह संख्या उसी अवधि में अन्य सेक्शन के सिग्नलों की तुलना में अत्यधिक अधिक है, जिससे संकेत मिलता है कि इस सेक्शन में रखरखाव की प्रक्रिया में गंभीर कमी रही।
जांच के प्रमुख निष्कर्ष
जांच ने पाया कि अंबट्टूर स्टेशन मास्टर के कार्यालय में स्थापित चेतावनी बज़र पूरी तरह से डिस्कनेक्ट था, जिससे कर्मचारियों को सिग्नल फेलियर की तुरंत सूचना नहीं मिली। इसके अलावा, फील्ड तकनीशियन ने दोषपूर्ण सेंसर को बदलते समय मूल कारण की जाँच नहीं की; उन्होंने बस सेंसर को बदल दिया और सिग्नल को रीसेट कर दिया। इस प्रकार, दोषपूर्ण भागों की खपत तेज़ी से बढ़ी जबकि वास्तविक समस्या बनी रही।
सुरक्षा प्रणाली में मौलिक खामियां
रिपोर्ट में उजागर किया गया कि मल्टी‑सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) के डेटा लॉगर से वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर को संभावित रीसेट प्रयास की सूचना नहीं पहुँची। साथ ही, सिग्नलिंग सिस्टम के डायग्नॉस्टिक पैनल में फेल‑सेफ़ मैकेनिज़्म की कमी थी, जो ऐसी स्थितियों में स्वचालित अलर्ट उत्पन्न नहीं कर पाता।
भविष्य की दिशा और सिफ़ारिशें
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रेलवे को न केवल उपकरणों की नियमित जांच बल्कि प्रत्येक विफलता के मूल कारण का विश्लेषण करने की प्रतिबद्धता अपनानी चाहिए। वास्तविक‑समय अलर्ट प्रणाली, बज़र की कार्यक्षमता, तथा फील्ड स्टाफ को तकनीकी प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि ऐसी त्रुटियां दोहराई न जाएँ।