बेंगलुरु की विशेष अदालत ने अल‑हिंद मॉड्यूल से जुड़े इस‑संबंधित आतंकवादी मोहम्‍मद हनीफ़ को सभी आरोपों में दोषी ठहराते हुए सात साल की सख़्त जेल की सजा सुनाई। यह फैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कई सालों की जांच के बाद आया, जिसने कर्नाटक और तमिलनाडु में फैले एक उग्रवादी नेटवर्क को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मोहम्‍मद हनीफ़ को 7 साल की सजा
  • आरोप: आठ आतंकवादी धारा, साजिश, अवैध हथियार खरीद
  • केस दक्षिण भारत में IS‑संबंधित नेटवर्क पर NIA की कार्रवाई को उजागर करता है

बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने 31 वर्षीय मोहम्‍मद हनीफ़ को सात साल की कड़ी जेल की सजा सुनाई, जबकि उन्होंने सभी सात आतंकवादी धारा, एक साजिश धारा और एक अवैध हथियार खरीद धारा में दोषी ठहराया गया। हनीफ़, जो मूल रूप से मंड्या के रहने वाले हैं, अल‑हिंद मॉड्यूल का सदस्य बताया गया और इस‑संबंधित (IS) से जुड़ी एक गंभीर साजिश में शामिल थे।

पृष्ठभूमि और NIA की जांच

2020 में कर्नाटक और तमिलनाडु के दक्षिणी राज्यों में उभरते इस‑संबंधित आतंकवादी साजिश के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले की व्यापक जाँच शुरू की। NIA ने 20 संदेहियों पर आरोपपत्र दायर किया, जिनमें हनीफ़ भी शामिल थे। जांच के दौरान पता चला कि अल‑हिंद मॉड्यूल ने विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर युवाओं को उग्रवादी विचारधारा से प्रभावित किया, वित्तीय सहायता जुटाई और हथियारों की अवैध खरीदारी की।

क़ानूनी प्रक्रिया और दोषी कबूल

हनीफ़ ने पहले सितंबर 2025 में निरपराधता का दावा किया था, परन्तु इस साल की शुरुआत में उन्होंने सभी आरोपों में ‘गिल्टी’ (दोषी) होने का इरादा बताया। विशेष अदालत ने इस कबूल को स्वीकार कर उन्हें सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यदि जुर्माना (₹5,000) न दिया गया तो अतिरिक्त दो महीने की कठोर जेल होगी, और मौजूदा पाँच साल की हिरासत को नई सजा में घटाकर गिना जाएगा।

भविष्य के प्रभाव

यह फैसला भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दक्षिण भारत में IS‑संबंधित नेटवर्क को तोड़ने के लिए NIA की कार्रवाई और अब अदालत की सजा दोनों ही भविष्य में संभावित उग्रवादी समूहों को हतोत्साहित करने की उम्मीद जताते हैं। साथ ही, यह मामला ग्राउंड‑लेवल पर उग्रवृत्ति को रोकने हेतु पूर्व-निवारक निगरानी की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाता है।