गांधीनगर नगर निगम ने 11 करोड़ रुपये के बजट से 600‑साल पुरानी इंद्रोदा किले की बहाली की योजना पेश की है। इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह किला राज्य की एक अनोखी विरासत संरचना है, जिसका पुनरुद्धार पर्यटन को बढ़ावा देगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इंद्रोदा किले की बहाली के लिए 11 करोड़ रुपये का टेंडर जारी
- किला 600 साल से अधिक पुराना माना जाता है, परन्तु दस्तावेज़ी प्रमाण कम
- स्थानीय कथा के अनुसार किले में राजाओं का विश्राम स्थल तथा सैनिकों का शिविर था
गांधीनगर, गुजरात की राजधानी, पर एक धुंधली धरोहर का पुनरुत्थान संभव हो रहा है। इंद्रोदा किला, जो साबरमती नदी के किनारे स्थित है, आज केवल टूटा‑टूटा बास्टियन और कुछ दीवारों के टुकड़ों से बचा है, परन्तु इसकी ऐतिहासिक महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इतिहास और लोककथाएँ
स्थानीय लोगों के अनुसार, इंद्रोदा किला 600 से अधिक वर्ष पुराना है और संभवतः 15वीं शताब्दी में गोकवाड़ राजवंश के समय निर्मित हुआ। विविध कथाओं में कहा जाता है कि अहमद शाह बदशाह ने इस किले को अपने यात्रा मार्ग में विश्राम स्थल के रूप में उपयोग किया, जबकि अन्य लोककथाएँ इसे राजा इंद्रसिंह या रांबाई दादी के समय की याद में निर्मित बताती हैं। इन कहानियों ने किले को स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विश्वास का प्रतीक बना दिया है।
वर्तमान स्थिति
साल 2006 के बाद भारी मानसून ने किले की दीवारों को ध्वस्त कर दिया। आज केवल लगभग 225 मीटर की दीवार शेष है, जबकि मूल रूप में 800 मीटर की चारों दिशा में विस्तारित रैम्पार्ट्स थे। किले की ईंटें 65 सेमी चौड़ी और चूने की प्लास्टर वाली हैं, जिनमें एक 1.7 मीँटर ऊँचा सुरक्षा पथ भी था। वर्तमान में बचे बास्टियन को ही संरक्षित किया गया है।
पुनर्स्थापन की योजना
गांधीनगर नगर निगम (GMC) ने किले के पुनर्स्थापन के लिए 11 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। नगर अभियंता भारत पंड्य ने प्रस्तावित किया है कि 250 मीटर की मौजूदा दीवार की मरम्मत और 400 मीटर नई दीवार का निर्माण किया जाए। इस कार्य से किले की सम्पूर्ण संरचना को पुनः स्थापित किया जाएगा, जिसमें बास्टियन, गजिबो और दर्शनीय मंच भी शामिल होंगे। योजना का उद्देश्य न केवल धरोहर को संरक्षित करना, बल्कि पर्यटन को प्रोत्साहित करके स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना भी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
इंद्रोदा गांव के कई वृद्ध नागरिकों ने बचपन में किले के बास्टियन पर खेलते हुए अपने अनुभव साझा किए। कई लोग आशावादी हैं, परन्तु इतिहासकारों ने दस्तावेज़ी साक्ष्य की कमी पर संकेत दिया है, जिससे पुनर्स्थापना के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
यदि सफल रहा, तो इंद्रोदा किला गुजरात में एकमात्र ऐसी विरासत संरचना बन जाएगा, जो शहर की शहरी परिदृश्य में ऐतिहासिक गहराई जोड़ सकता है।