नागपट्टिनम रेलवे स्टेशन का 165 वर्ष पुराना पूरी तरह ढक्कन वाला प्लेटफॉर्म सhelter, जो दक्षिणी रेलवे कंपनी ने बritish काल में बनाया था, को धरोहर स्थल के रूप में स्वीकृति देने की मांग पर रेल यूज़र्स का आवाज़ उठाना।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नागपट्टिनम रेलवे स्टेशन का 1861 में बनाया गया ऐतिहासिक प्लेटफॉर्म सhelter 165 वर्षों से स्थिर है
- दक्षिणी रेलवे प्रशासन से धरोहर स्थल के रूप में घोषणा की मांग की गई है
- इसमें आयात वाले इरॉन कॉलम और गिर्डर्स का उपयोग हुआ था
तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में स्थित रेलवे स्टेशन का एक अनौठा ऐतिहासिक सhelter अब 165 वर्षों से सक्रियता का प्रदर्शन कर रहा है। वर्ष 1861 में तत्कालीन दक्षिणी भारतीय रेलवे कंपनी द्वारा बritish शासन काल में बनाया गया इस पूरी तरह ढक्कन वाले प्लेटफॉर्म सhelter को रेल यूज़र्स समिति ने धरोहर स्थल के रूप में स्वीकृति दिलाने की गंभीर मांग प्रस्तुत की है। इस ऐतिहासिक स्थावर की सुंदरता और इन्जीनियरिंग की उत्कृष्टता आज भी पूरी ताकत से खड़ी है, हालांकि उस समय की तकनीकों की तुलना में यह एक अद्भुत उपलब्धि है।
भारतीय रेल वास्तुकला का अमूल्य धन
नागपट्टिनम रेल यूज़र्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. मोहन ने बताया कि चेन्नई एगमोर और नागपट्टिनम रेलवे स्टेशन्स को बritish काल में आयात वाले इरॉन कॉलम और गिर्डर्स का उपयोग करके पूरी तरह ढके प्लेटफॉर्म सhelter प्रदान किए गए थे। अद्भुत बात यह है कि 165 वर्षों के बाद भी यह इरॉन कॉलम्स ज़्यादा जोखिम के बिना स्थिर हैं और जंग से मुक्त हैं, जो दर्शाता है कि उस समय की गुणवत्तापूर्ण इन्जीनियरिंग मानकों का कोई सम्माननीय विकल्प नहीं है। इस प्लेटफॉर्म सhelter की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उस समय उसमें केवल आकस्मिक छह या सात कोच बसा सकते थे।
चेन्नई एगमोर के साथ समानता
मोहन ने यह भी उल्लेख किया कि चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन में स्थित ऐतिहासिक पूरी तरह ढके ट्रेन सhelter को पहले ही धरोहर स्थल के रूप में स्वीकृति दिलाई गई है। उनके अनुसार, नागपट्टिनम के इस सhelter की भी भव्य वास्तुशिल्प, इतिहासिक और इन्जीनियरिंग महत्व होना चाहिए। इस सhelter को संरक्षित करना और सही ढंग से उसका ध्ययान रखना आवश्यक है ताकि भारतीय रेल वास्तुकला के इतिहास का यह अमूल्य टुकड़ा आने वाले समय तक सुरक्षित रह सके।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की दिशा
हाल के समय में नागपट्टिनम के वरिष्ठ रेलवे प्रबंधक और तिरुचिरापल्ली के विभागीय रेलवे प्रबंधक को एक स्मरणपत्र प्रस्तुत करते हुए मोहन ने प्रशासन को इस ऐतिहासिक सhelter को धरोहर स्थल के रूप में घोषित करने और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई शुरू करने की अपील की है। इस मांग के समर्थन में विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में जोर दिया गया है और यह भी समझाया गया है कि कैसे इस तरह के स्थावरों के संरक्षण से पारंपरिक संस्कृति और भारतीय इतिहास के संप्रेषण को बल मिल सकता है।
सांस्कृतिक विरासत का महत्व
देश में कई ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन्स के संरक्षण के उदाहरण उपलब्ध हैं, लेकिन नागपट्टिनम का यह प्लेटफॉर्म सhelter अपनी विशिष्ट वास्तुशिल्प शैली और उत्कृष्ट इन्जीनियरिंग ने कदर हो। इसके संरक्षण के साथ ही इसका ज्ञानप्रदान और प्रदर्शन करना चाहिए, जिससे आने वाले पीढ़ियों को भारतीय रेल विकास के इतिहास के बारे में जानकारी हो सके।