17‑ वर्षीय पन्शुल बंसल ने NEET‑UG पुनः‑परीक्षा में 750 अंक प्राप्त कर ऑल‑इंडिया रैंक 1 हासिल किया। संतुलित अध्ययन‑जीवन और विविध शौकों ने उसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई, और अब वह AIIMS में स्नातक चिकित्सा कोर्स की ओर अग्रसर है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पन्शुल बंसल ने पुनः‑परीक्षा में 750 अंक कर NEET‑UG में AIR 1 हासिल किया।
- संतुलित अध्ययन‑समय, परिवार के साथ समय, और शौकियों ने तनाव कम किया।
- भविष्य में वह AIIMS में प्रवेश लेकर न्यूरोसर्जरी या कार्डियोथोरैसिक सर्जरी करना चाहता है।
NEET‑UG (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) भारत के सबसे प्रतिस्पर्धी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के रूप में जाना जाता है, जहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 15 लाख उम्मीदवार भाग लेते हैं। इस परीक्षा में 700‑750 अंक तक का स्कोर अक्सर शीर्ष रैंक की गारंटी माना जाता है, परंतु 2026 की पुनः‑परीक्षा ने एक नई कहानी लिखी।
पुनः‑परीक्षा की पृष्ठभूमि
जून 21 को मूल परीक्षा रद्द हो जाने के बाद, NTA ने पुनः‑परीक्षा आयोजित की। इस अवसर ने कई आश्रित छात्रों को फिर से अपना सर्वश्रेष्ठ दिखाने का मौका दिया, और 17‑ वर्षीय पन्शुल बंसल ने इस माहौली में 750 अंक प्राप्त करके सभी को चकित कर दिया।
पन्शुल की तैयारी – संतुलन की मिसाल
आमतौर पर भारतीय प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के साथ जुड़ी ‘अंतहीन अध्ययन घंटे और एकांत’ की छवि को तोड़ते हुए, पन्शुल ने एक व्यवस्थित दैनिक समय‑सारिणी अपनाई। वह सुबह 6:30 वजे उठता, 9 वजे से पढ़ाई शुरू करता, दोपहर में लंबा भोजन‑विराम लेता, फिर शाम तक पढ़ाई जारी रखता, और रात में एक घंटे की पुनरावृत्ति करता। इस दौरान वह परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने, पियानो, स्केटिंग, ट्यूबिंग, आउटडोर खेल और वीडियो गेम जैसे शौकों में भी संलग्न रहता।
मुख्य रणनीति
पन्शुल का मानना है कि “प्रश्न अभ्यास” ही सफलता की कुंजी है। वह निरंतर मॉक टेस्ट देता, जिससे वह अपनी कमजोरियों की पहचान कर सके। इसके अलावा, वह सभी तीन मुख्य विषय‑भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान‑ में समान स्तर बनाये रखने पर जोर देता, जिससे कोई एक विषय विशेष रूप से कठिन न लगे।
परिणाम और भविष्य की दिशा
750 अंक के साथ AIR 1 प्राप्त करने के बाद पन्शुल ने तुरंत अपना लक्ष्य घोषित किया – AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में प्रवेश लेना। वह अभी तक अपनी विशेषता तय नहीं कर पाया है, परन्तु न्यूरोसर्जरी और कार्डियोथोरैसिक सर्जरी में विशेष रुचि दर्शा रहा है। इस उपलब्धि न केवल उसके व्यक्तिगत सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि देश भर के मेडिकल aspirants के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनती है।
पन्शुल की कहानी यह स्पष्ट करती है कि निरंतरता, संतुलित जीवन‑शैली और लक्ष्य‑उन्मुख अभ्यास, अत्यधिक तनाव के बजाय, दीर्घकालिक सफलता की नींव होते हैं।