भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है, जिसमें तकनीक हस्तांतरण और भूमि अधिग्रहण पर केंद्रीय सब्सिडी समाप्त कर दी गई है। 1.27 लाख करोड़ रुपये के इस नए दौर में सरकार का मुख्य फोकस चिप डिजाइन, आपूर्ति श्रृंखला और अनुसंधान एवं विकास पर होगा।
मुख्य बिंदु
- तकनीक हस्तांतरण और भूमि अधिग्रहण पर सब्सिडी समाप्त, राज्यों को भूमि के लिए आगे आना होगा।
- ISM 2.0 में चिप डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला पर प्राथमिकता, विनिर्माण इकाइयों पर सब्सिडी में कटौती।
- 1.27 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 7 नैनोमीटर तकनीक पर विशेष ध्यान, 2029 तक 75% स्वावलंबन का लक्ष्य।
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं में एक नया अध्याय जुड़ा है, लेकिन इसकी दिशा बदल गई है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसका सबसे प्रमुख पहलू यह है कि अब कंपनियों को तकनीक हस्तांतरण (technology transfer) और चिप विनिर्माण संयंत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण पर कोई केंद्रीय सब्सिडी नहीं मिलेगी। सरकार का मानना है कि तकनीक हस्तांतरण की लागत की गणना अत्यंत जटिल और अपारदर्शी होती है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है।
रणनीतिक बदलाव: विनिर्माण से डिजाइन की ओर
पिछले दौर में, जहां सरकार विनिर्माण इकाइयों (fabs) की स्थापना पर भारी भर्ती कर रही थी, वहीं अब फोकस 'डिजाइन' और 'इकोसिस्टम' बनाने पर है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, नई योजना की प्राथमिकताओं में सबसे पहले चिप डिजाइनिंग, दूसरे स्थान पर आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को मजबूत करना और तीसरे स्थान पर नई विनिर्माण इकाइयों को सब्सिडाइज़ करना है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल 'असेंबली' या 'निर्माण' के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि डिजाइन और नवाचार के हब के रूप में उभरना चाहता है।
वित्तीय प्रोत्साहन और नए लक्ष्य
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत 1.27 लाख करोड़ रुपये के इस नए पैकेज में विनिर्माण संयंत्रों (Fabs) के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) सब्सिडी भी कम कर दी गई है। जहां पहले 50% की सब्सिडी थी, वहीं अब सिलिकॉन फैब्स को 40% और अन्य फैब्स को 35% की सब्सिडी मिलेगी। हालांकि, सरकार चिप डिजाइन करने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स में इक्विटी लेने और अनुदान देने के लिए तैयार है। इसके अलावा, चिप विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, रसायनों और गैसों के लिए 30% तक की प्रोत्साहन राशि रखी गई है।
खास बात यह है कि सरकार अब '7 नैनोमीटर' जैसी अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित चिप्स के डिजाइन और अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगी, जिसके लिए 75% तक की सब्सिडी का प्रावधान है। यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थान दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि 2029 तक देश अपनी 70-75% जरूरतों को खुद पूरा कर सके और 2035 तक दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल हो सके।