फ़रहाद सामजी ने बताया कि अक्षय कुमार ने फिल्म में 14 फ़्लॉप फिल्मों वाले बोझपुरी अभिनेता के किरदार को उत्साह से स्वीकार किया। उन्होंने इस दृश्य को फिल्म की कहानी में आवश्यक माना और इसे ‘सबसे बेहतरीन लाइन’ कहा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अक्षय ने फ़्लॉप अभिनेता के दृश्य को तुरंत स्वीकार किया और उसे सबसे बेहतरीन माना।
- फ़रहाद सामजी ने नेराज़ वोहरा की मूल स्क्रिप्ट को आगे बढ़ाते हुए संवाद और किरदारों को संवारा।
- फिल्म की दो हिस्से में मिश्रित प्रतिक्रिया, विशेषकर द्वितीय अर्द्ध में ट्रॉपिक थंडर की समानताएँ देखी गईं।
फ़िल्म Welcome To The Jungle ने विश्व स्तर पर 186.58 करोड़ रुपये की कमाई की, लेकिन समीक्षकों और दर्शकों से मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया ने इसे चर्चा का केंद्र बना दिया। लेख के लेखक फ़रहाद सामजी ने स्क्रीन के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि कैसे उन्होंने दिवंगत नेराज़ वोहरा की मूल दृष्टि को आगे बढ़ाया और अक्षय कुमार ने अपने किरदार को किस तरह अपनाया।
फ़रहाद सामजी का लेखन यात्रा
नेराज़ वोहरा ने 2017 में असामयिक निधन किया, तब फ़रहाद ने संवाद लेखन और किरदार निर्माण का कार्य संभाला। उन्होंने बताया कि वोहरा के साथ उनका जुड़ाव ‘बोल बाच्चन’ के सेट पर शुरू हुआ और वह फ़िल्म की कहानी को तीन साल से अधिक समय तक परिपूर्ण करने में लगे रहे। “हम 20‑25 ड्राफ्ट लिखते रहे, हर शेड्यूल के बाद बदलाव करते रहे,” सामजी ने कहा।
अक्षय कुमार की प्रतिक्रिया
फ़िल्म में अक्षय एक बोझपुरी अभिनेता की भूमिका में हैं, जिसकी 14 फ़िल्में बॉक्स‑ऑफ़िस पर टैंके हैं। कई लोग इसे अक्षय की हालिया असफल फिल्मों से जोड़ते रहे, परंतु सामजी ने बताया कि अक्षय ने इस पंक्ति को “सबसे बेहतरीन लाइन” कहा और इसे पूरी तरह से स्वीकार किया। लंदन में पहली ड्राफ्ट पेश करने के दौरान उन्होंने इसे “एक चुटकी नमक” की तरह लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह इस व्यंग्यात्मक मोड़ को समझते हैं।
फ़िल्म में उद्योग की सच्चाइयाँ
‘Welcome To The Jungle’ में प्रोड्यूसर द्वारा काले पैसे का उपयोग, वैनीटी वैन की माँगें और अन्य उद्योग‑संबंधी मुद्दों को हल्के‑फुल्के ढंग से दिखाया गया है। सामजी ने कहा, “ये सीन हमारे मुख्य उद्देश्य नहीं थे, बल्कि नेराज़ की मूल स्क्रिप्ट में ही मौजूद थे और हम उन्हें मसाला की तरह जोड़ते हैं।”
दर्शकों की आलोचना और तुलना
दर्शकों ने द्वितीय अर्द्ध को धीमा और भीड़भाड़ वाला बताया, साथ ही कुछ ने इसे बैन स्टिलर की ‘Tropic Thunder’ से तुलना की। सामजी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ‘Tropic Thunder’ को नहीं देखा था, परंतु समानता कुछ पहलुओं में स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, “हमने कहानी में नयी ताजगी लाने की पूरी कोशिश की है, जबकि कुछ तत्वों में समानता अनिवार्य थी।”
आज के डिजिटल युग में लेखकों को संवेदनशील दर्शकों के लिये “फ़िल्टर” रखना पड़ता है, परंतु इस फिल्म के कॉमेडी तत्व को सामजी ने “नो‑ब्रेनर” कहा।