भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नया व्यापक आर्थिक व व्यापार समझौता 15 जुलाई से कार्यान्वित होगा। यह समझौता यूके के 98.8% टैरिफ़ लाइनों और 99.5% व्यापार मूल्य पर शुल्क में कटौती करेगा, जबकि भारत के 89.5% टैरिफ़ लाइनों को भी हटाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- यूके 98.8% टैरिफ़ लाइनों और 99.5% व्यापार मूल्य पर शुल्क हटाएगा।
- भारत 89.5% टैरिफ़ लाइनों और 89.4% व्यापार मूल्य पर कटौती करेगा, जिसमें 30.3% तत्काल प्रभाव से।
- डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) 75,000 से अधिक भारतीय कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा भुगतान से बचाएगा।
भारत-यूके व्यापक आर्थिक व व्यापार समझौता (CETA) और डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) 15 जुलाई को लागू होने के साथ दो बड़े अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक नई आर्थिक वास्तुकला स्थापित करेगा। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे “सबसे महत्वाकांक्षी और आशावादी मुक्त व्यापार समझौता” कहा, जो टैरिफ़ एवं गैर‑टैरिफ़ बाधाओं दोनों में गहरा सुधार लाता है।
पृष्ठभूमि और वार्ता प्रक्रिया
यह समझौता पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षरित किया गया था, लेकिन कई महीनों की विस्तृत परामर्श के बाद ही लागू किया जा रहा है। वार्ता में 30 अध्याय शामिल हैं, जिनमें डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, छोटे एवं मध्यम उद्यम, नवाचार, श्रम, पर्यावरण और लिंग समानता जैसे व्यापक क्षेत्रों को कवर किया गया है। इस व्यापक कवरेज ने इसे “गोल्ड स्टैंडर्ड” कहा जाना सुनिश्चित किया है।
टैरिफ़ कटौती की विस्तृत आकड़ें
समझौते के तहत यूके तुरंत 96.8% टैरिफ़ लाइनों को हटाएगा, जो 97.7% व्यापार मूल्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। अतिरिक्त 2% लाइनों पर कोटा‑आधारित घटित टैरिफ़ लागू होगा, जिससे कुल 98.8% लाइनों और 99.5% व्यापार मूल्य पर राहत मिलती है। भारत भी 30.3% व्यापार मूल्य पर तुरंत टैरिफ़ हटाएगा, और अगले चरण में 47% को क्रमिक रूप से हटाने की योजना है, जिससे कुल 89.5% टैरिफ़ लाइनों और 89.4% व्यापार मूल्य को कवर किया जाएगा।
गैर‑टैरिफ़ बाधाएँ और संवेदनशील सेक्टर
समझौता केवल टैरिफ़ नहीं, बल्कि सैनीटरी‑फ़िटो‑सैनिटरी (SPS) और तकनीकी बाधाओं (TBT) को भी हल करता है, जिससे भविष्य में अनावश्यक व्यापार प्रतिबंधों की संभावना कम हो। भारत ने अपने दुग्ध, अनाज, दाल, सब्जी, सोना‑ज्वेलरी, स्मार्टफ़ोन और महत्वपूर्ण पॉलिमर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा प्रदान की है।
डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) का प्रभाव
DCC भारतीय कर्मचारियों के लिए एक गेम‑चेंजर माना गया है। वर्तमान में भारतीय कर्मचारी अपनी वेतन का लगभग 25% यूके के राष्ट्रीय बीमा प्रणाली में योगदान देते हैं, बिना किसी प्रतिफल के। DCC के तहत, यदि वे भारत में सामाजिक सुरक्षा का भुगतान कर रहे हैं, तो उन्हें यूके में दोहरा योगदान नहीं देना पड़ेगा, जिससे 75,000 से अधिक कर्मचारियों और 900 से अधिक नियोक्ताओं को लाभ होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल वस्तु व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि वित्तीय सेवाओं, फिनटेक, सतत वित्त और बुनियादी ढाँचा निवेश जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को तेज करेगा। लंदन में स्थित सिटी कॉरपोरेशन के नीति अध्यक्ष क्रिस हेवार्ड ने कहा कि यह समझौता “वैश्विक पूँजी और विशेषज्ञता को आकर्षित करने के लिए एक मजबूत मंच” प्रदान करता है। भारत के निरंतर आर्थिक विकास के साथ, यह समझौता दोनों देशों के लिए नई वृद्धि की राह खोलता है।