भारत और कनाडा ने ओटावा में प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की तीसरी वार्ता पूरी की। वस्तु‑सेवा, बौद्धिक संपदा और तकनीकी बाधाओं सहित कई मुद्दों पर प्रगति के साथ दो पक्ष 2030 तक व्यापार को $50 अर्ब तक बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तीसरा चरण सफलतापूर्वक समाप्त, वार्ता 2026 में समाप्त करने का लक्ष्य
- वस्तु, सेवाएँ, बौद्धिक संपदा, उत्पत्ति नियम, स्वच्छता मानक और तकनीकी बाधाओं पर सहमति की राह
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 अर्ब तक बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और कनाडा ने 6‑10 जुलाई 2026 को ओटावा में आयोजित प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) की तीसरी वार्ता का सफलतापूर्वक समापन किया। यह चरण पाँच दिनों की गहन बातचीत का हिस्सा था, जिसमें वस्तु‑सेवा व्यापार, बौद्धिक संपदा, उत्पत्ति नियम, स्वच्छता एवं फाइटोसैनिटरी उपाय, और तकनीकी बाधाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
वार्ता का महत्व और समय‑सीमा
वाणिज्य विभाग के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों ने 2026 में ही CEPA को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इस समझौते को शीघ्रता से पूरा करने की इच्छा दोनों पक्षों के आर्थिक रणनीति में परिवर्तन का संकेत देती है, विशेषकर वैश्विक आपूर्ति‑शृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के संदर्भ में।
वर्तमान व्यापार आंकड़े और लक्ष्य
2025‑26 वित्तीय वर्ष में द्विपक्षीय व्यापार में 8.22% गिरावट दर्ज हुई, कुल $7.95 अर्ब पर स्थिर रहा (निर्यात $4.67 अर्ब, आयात $3.28 अर्ब)। दोनों पक्ष $50 अर्ब तक व्यापार को बढ़ाने के लक्ष्य को 2030 तक हासिल करने के लिए CEPA को एक प्रमुख उपकरण मानते हैं। कनाडा की जनसंख्या 41.65 मिलियन (2025) और जीडीपी $2.34 त्रिलियन (PPP) के साथ एक महत्वपूर्ण बाजार है।
मुख्य निर्यात‑आयात वस्तुएँ
भारत से कनाडा को प्रमुख निर्यात में दवाएँ, लोहे‑स्टील, समुद्री खाद्य, कपास के वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन शामिल हैं। इसके विपरीत, भारत आयात करता है दालें, मोती‑आधारित रत्न, कोयला, उर्वरक, कागज और कच्चा तेल। सेवा क्षेत्र में, भारत टेलीकॉम, कंप्यूटर‑सूचना सेवाएँ और विभिन्न व्यावसायिक सेवाएँ निर्यात करता है।
भविष्य की संभावनाएँ
इंडिया‑कनाडा संबंधों में 425,000 से अधिक भारतीय छात्रों और एक मजबूत भारतीय समुदाय की उपस्थिति दोनों देशों के आर्थिक और सांस्कृतिक बंधनों को और मजबूत करती है। प्रमुख वार्ता दल के प्रमुख, भारत के ब्रिज मोहन मिश्रा और कनाडा के ब्रूस क्रिस्टी, ने संकेत दिया है कि आगामी चरणों में निवेश, नवाचार और स्थायी विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
यदि CEPA सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो यह न केवल व्यापार मात्रा को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों को नई तकनीकी सहयोग के द्वार खोलने में भी मदद करेगा।