फीफा ने इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में जीत के बाद 'फ़ॉकलैंड अर्जेंटीना का है' का राजनीतिक बैनर प्रदर्शित करने के लिए अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इस संवेदनशील घटना ने खेल के मैदान पर दशकों पुराने भू-राजनीतिक तनाव को एक बार फिर हवा दे दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति लिसैंड्रो मार्टिनेज और जियोवानी लो सेल्सो द्वारा राजनीतिक बैनर लहराए जाने की जांच कर रही है।
- खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में शानदार जीत के बाद 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास' (फ़ॉकलैंड अर्जेंटीना का है) का बैनर दिखाया था।
- ब्रिटिश सरकार ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है, जबकि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों की भावनाओं का खुलकर समर्थन किया है।
फीफा (FIFA) ने अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ियों लिसैंड्रो मार्टिनेज और जियोवानी लो सेल्सो के खिलाफ एक विवादित राजनीतिक बैनर प्रदर्शित करने के मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर विश्व कप सेमीफाइनल में ऐतिहासिक जीत के बाद मैदान पर जश्न मनाने के दौरान हुई। दोनों खिलाड़ियों ने मैदान पर 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास' (Las Malvinas son Argentinas) लिखा हुआ एक बड़ा बैनर लहराया, जिसका सीधा अर्थ है 'फ़ॉकलैंड द्वीप समूह अर्जेंटीना का है।' इस दृश्य को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और वैश्विक मीडिया में हलचल मच गई।
फीफा के कड़े नियम और पुराना इतिहास
फीफा के कड़े नियमों के अनुसार, खेल के मैदान पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेशों को प्रदर्शित करने की सख्त मनाही है। फीफा के प्रवक्ता ने एक बयान में पुष्टि की है कि उनकी स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति वर्तमान में मैच रिपोर्टों का आकलन कर रही है और फीफा अनुशासन संहिता के आधार पर संभावित कदमों पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब अर्जेंटीना को इस मुद्दे पर फीफा के गुस्से का सामना करना पड़ा है; साल 2014 में भी स्लोवेनिया के खिलाफ एक दोस्ताना मैच से पहले इसी तरह का बैनर दिखाने के लिए अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) पर 20,000 पाउंड का जुर्माना लगाया गया था।
ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच गहरा भू-राजनीतिक विवाद
फ़ॉकलैंड द्वीप समूह (जिसे अर्जेंटीना में माल्विनास कहा जाता है) को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक है। साल 1982 में हुए फ़ॉकलैंड युद्ध में 649 अर्जेंटीना के सैनिक, 255 ब्रिटिश सैनिक और तीन द्वीपवासी मारे गए थे। इस ताजा घटना पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'विश्व कप भले ही हमारा न हो, लेकिन फ़ॉकलैंड द्वीप समूह निश्चित रूप से हमारा है।' उन्होंने आगे कहा कि द्वीपवासियों का आत्मनिर्णय का अधिकार सर्वोपरि है और इस पर ब्रिटेन की प्रतिबद्धता कभी नहीं डिगेगी।
अर्जेंटीना सरकार का खिलाड़ियों को समर्थन
दूसरी ओर, अर्जेंटीना के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जेवियर माइली ने अपने खिलाड़ियों के इस कृत्य का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों ने जो किया वह पूरी तरह से समझ में आता है; वे अपनी भावनाओं में बह गए और आवेग में आकर काम किया, जिससे संभवतः जुर्माने को लेकर चर्चा शुरू होगी।' देश की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने भी सोशल मीडिया पर इस पल की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि माल्विनास अर्जेंटीना का है और इसे कोई भी उनके दिल और खून से नहीं निकाल सकता।
खेल और कूटनीति का पुराना टकराव
फुटबॉल के इतिहास में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच का मुकाबला हमेशा से ही खेल से कहीं अधिक कूटनीतिक और ऐतिहासिक प्रतिशोध का मंच रहा है। 1986 के विश्व कप में डिएगो माराडोना का प्रसिद्ध 'हैंड ऑफ गॉड' गोल भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ माना जाता है। फीफा की यह जांच अब यह तय करेगी कि क्या खेल के मैदान पर राष्ट्रवाद की इस अभिव्यक्ति पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा या खिलाड़ियों पर निलंबन की गाज गिरेगी।