जो रूट ने 133 गेंदों पर 99 रन बनाकर अपनी 42वीं ODI सदी के एक रन से कम रह गए, जबकि इंग्लैंड ने कार्डिफ़ में भारत को चार विकेट से मात दी। यह जीत श्रृंखला को 1‑1 बराबर करती है और लॉर्ड्स में तय होने वाले निर्णायक मैच का मंच तैयार करती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जो रूट 99 पर अटके, लेकिन इंग्लैंड ने जीत सुनिश्चित की
  • इंग्लैंड ने 234 लक्ष्य को चार विकेट से पीछा किया
  • सीरीज अब 1‑1 बराबर, लॉर्ड्स में निर्णायक ODI तय होगा

कार्डिफ़ में दूसरे ODI में इंग्लैंड ने भारत को छह विकेट से हराकर श्रृंखला को बराबर कर दिया। जो रूट ने 133 गेंदों पर 99* बना कर अपनी 42वीं ODI सदी को केवल एक रन से चूक गए, पर उनका स्थिर अंकर शॉट्स भारत के लक्ष्य को ट्रैक पर रखते रहे।

मैच की कहानी

भारत ने 234 रन का लक्ष्य निर्धारित किया, लेकिन शुरुआती विकेटों पर उनका दबाव बढ़ गया। ओपनर बें डकिट ने पहली गेंद पर ही गोल्डन डक किया, जबकि उनका साथियों जैस्प्रित बुमराह और जैकोब बेतहेल ने क्रमशः चौथे ओवर में ही बाहर हो गए। इस स्थिति में इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक, सैम करन और जोस बटलर ने रूट के साथ मिलकर स्थिर साझेदारी बनाई, जिससे टीम को लक्ष्य की ओर बढ़ने का मौका मिला।

विल जैक्स की भूमिका

विल जैक्स ने पाँचवें विकेट के साथ 72 रन बनाए और रूट के साथ 40वीं ओवर तक साझेदारी को मजबूत किया। जैक्स के बाद गस एटकिंसटन ने तेज़ी से रन चुराए, और अंत में उन्होंने जीत के रन छिड़के, जबकि रूट 99 पर अटके रहे। यह न सिर्फ व्यक्तिगत निराशा थी, बल्कि इंग्लैंड के लिए एक प्रबंधनीय जीत भी थी।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने रोहित शर्मा और शुभमन गिल के साथ 44 रन की शुरुआती साझेदारी बनायी, उसके बाद रोहित और विराट कोहली ने 60 रन का 61 गेंदों में शानदार सत्र चलाया। कोहली ने 65 रन बनाकर 66वीं गेंद पर जॉफ़्रा आर्चर के हाथों से बाहर हो गए। श्रीयास इयर ने 67‑रन की साझेदारी बनाने के बाद भी टीम को आगे नहीं ले जा सके, और बुमराह ने 13 गेंदों में 20* अनाब्लिंग के साथ अंत किया।

आगे का परिदृश्य

सीरीज़ अब 1‑1 बराबर है, और अंतिम ODI लॉर्ड्स में रविवार को खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच न केवल श्रृंखला जीतने की, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी ODI क्षमता को साबित करने की परीक्षा है। जो रूट के 99‑रन की कहानी यह दर्शाती है कि कैसे छोटे‑छोटे क्षणों में बड़े अंतर बनते हैं, और आगामी मैच में इंग्लैंड को रूट की निरंतरता पर भरोसा करना होगा, जबकि भारत को अपने मध्य‑क्रम में स्थिरता लाने की जरूरत होगी।