हॉकी इंडिया के भीतर यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के गंभीर आरोपों के बाद, खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को एक निष्पक्ष जांच समिति बनाने का आदेश दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पूर्व भारतीय कप्तान असुंता लकड़ा ने हॉकी इंडिया के सचिव मंडल के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • खेल मंत्रालय ने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए IOA को जांच का जिम्मा सौंपा है।
  • हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भी आंतरिक जांच के बजाय स्वतंत्र जांच की वकालत की है।
  • झारखंड हॉकी चुनावों को लेकर भी कानूनी चुनौती दी गई है।

नई दिल्ली: भारतीय हॉकी के गलियारों में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हॉकी इंडिया (HI) के भीतर यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और आरोपियों को संस्थागत संरक्षण देने के गंभीर आरोपों ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है। मामले की गंभीरता और निष्पक्षता पर उठते सवालों को देखते हुए, खेल मंत्रालय ने अब इस मामले की जांच का जिम्मा भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को सौंप दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

यह पूरा विवाद पूर्व भारतीय महिला कप्तान असुंता लकड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ है। असुंता ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंत्रालय को पत्र लिखकर आशंका जताई थी कि यदि हॉकी इंडिया की आंतरिक समिति इस मामले की जांच करती है, तो परिणाम पक्षपाती हो सकते हैं, क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों ही फेडरेशन के कार्यकारी बोर्ड के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।

संस्थागत पारदर्शिता पर संकट

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भी इस स्थिति की संवेदनशीलता को स्वीकार किया है। तिर्की ने स्वयं मंत्रालय से एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया था ताकि जांच की शुचिता बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों पक्ष बोर्ड के सदस्य हैं, इसलिए फेडरेशन द्वारा स्वयं जांच करना उचित नहीं होगा। मंत्रालय ने अब IOA को एक 'तटस्थ, निष्पक्ष और पारदर्शी' समिति बनाने का निर्देश दिया है।

झारखंड हॉकी चुनावों पर कानूनी तलवार

विवाद केवल राष्ट्रीय स्तर तक ही सीमित नहीं है। झारखंड के 13 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के एक समूह ने हॉकी झारखंड के आगामी चुनावों को अदालत में चुनौती दी है। इन खिलाड़ियों ने आरोप लगाया है कि भोलानाथ सिंह नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से अपने चौथे कार्यकाल के लिए पद पर बने रहना चाहते हैं। यह मामला अब राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (National Sports Governance Act) के उल्लंघन के दायरे में भी आ गया है, जिससे भारतीय खेल प्रशासन की छवि पर गहरा संकट मंडरा रहा है।