एक नए शोध ने खुलासा किया है कि कैसे नवजात शिशुओं का मस्तिष्क संगीत को पहचानता है और कैसे वे पहले साल के भीतर लयबद्ध तरीके से हिलना-डुलना शुरू कर देते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तीन महीने के शिशु भी संगीत की धुन को पहचानने की क्षमता रखते हैं।
- एक वर्ष की आयु तक आते-आते बच्चे संगीत की लय पर स्वतः ही नृत्य या थिरकना शुरू कर देते हैं।
- शोध के अनुसार, मस्तिष्क का 'डोर्सल ऑडिटरी स्ट्रीम' (Dorsal Auditory Stream) संगीत को शारीरिक हलचल में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- शिशुओं में उच्च स्वर (High-pitched) वाली संगीत के प्रति अधिक प्रतिक्रिया देखी गई।
संगीत मानव सभ्यता का एक अभिन्न हिस्सा है, जो उत्सवों से लेकर शोक तक हर भावना को व्यक्त करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे मस्तिष्क में संगीत के प्रति यह प्रतिक्रिया कब और कैसे शुरू होती है? हाल ही में eLife में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। मनोवैज्ञानिकों के एक समूह ने पाया है कि संगीत के प्रति हमारी प्रतिक्रिया जन्म के कुछ ही महीनों बाद शुरू हो जाती है।
विकासशील मस्तिष्क और संगीत का संबंध
शोधकर्ताओं ने पाया कि मात्र तीन महीने के शिशु भी संगीत की धुन (Melody) को पहचानने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे शिशु बढ़ते हैं, उनके मस्तिष्क की संगीत को समझने और उस पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता अधिक जटिल होती जाती है। अध्ययन के अनुसार, जब शिशु एक वर्ष के होते हैं, तो वे संगीत की लय पर स्वतः ही शरीर को हिलाना, झूमना और ताली बजाने जैसे संकेत देने लगते हैं।
वैज्ञानिक पद्धति और निष्कर्ष
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 79 बच्चों (जिनकी आयु 3, 6 और 12 महीने थी) का परीक्षण किया। शोधकर्ताओं ने EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम) तकनीक का उपयोग करके बच्चों के मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया। उन्होंने पाया कि संगीत की संरचनात्मक भविष्यवाणी (Predictability) के प्रति सभी आयु वर्ग के शिशुओं ने तीव्र श्रवण प्रतिक्रिया दिखाई।
शारीरिक हलचल का विकास
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता ट्रिन न्गुयेन (Trinh Nguyen) के अनुसार, पहले वर्ष के दौरान शिशु पहले अपने निचले शरीर (Lower body) को हिलाना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे उनके ऊपरी शरीर और पूरे शरीर की हलचल अधिक जटिल होती जाती है। यह विकास मस्तिष्क के 'डोर्सल ऑडिटरी स्ट्रीम' नामक तंत्रिका पथ (Neural pathway) के परिपक्व होने से जुड़ा है, जो लय को समझने और शरीर को उसके अनुरूप ढालने में मदद करता है।
यह शोध स्पष्ट करता है कि संगीत केवल सुनने की चीज़ नहीं है, बल्कि यह हमारे तंत्रिका तंत्र और शारीरिक विकास के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।