भारत सरकार ने टी. श्रीनिवास कुमार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव के रूप में दो वर्षों के लिए नियुक्त किया। वह पूर्व में भारतीय राष्ट्रीय समुद्री सूचना केंद्र (INCOIS) और ऑस्ट्रेलिया में समुद्री सुनामी चेतावनी प्रणाली के प्रमुख रहे हैं। इस नियुक्ति से भारत की आपदा प्रबंधन और समुद्री विज्ञान में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • टी. श्रीनिवास कुमार को दो वर्ष के लिए पृथ्वी विज्ञान सचिव नियुक्त किया गया
  • वह पूर्व में INCOIS एवं IOTWMS के प्रमुख रहे हैं
  • नियुक्ति भारत की सुनामी चेतावनी प्रणाली और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी

नई दिल्ली – भारत सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी कर टी. श्रीनिवास कुमार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव के रूप में दो साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया। यह घोषणा 17 जुलाई 2026 को प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि कुमार ने पहले भारतीय राष्ट्रीय समुद्री सूचना केंद्र (INCOIS) के प्रमुख के रूप में कार्य किया था और वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में स्थित भारतीय महासागर सुनामी चेतावनी एवं शमन प्रणाली (IOTWMS) के सचिवालय का नेतृत्व कर रहे थे।

पृष्ठभूमि और पेशेवर यात्रा

श्रीनिवास कुमार ने अपने करियर को समुद्री विज्ञान और आपदा प्रबंधन के संगम पर स्थापित किया है। INCOIS में उनका कार्यकाल भारत की समुद्री डेटा संग्रहण, पूर्वानुमान मॉडलिंग और राष्ट्रीय समुद्री नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके बाद, उन्होंने IOTWMS के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में काम करते हुए भारत की पहली सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। यह प्रणाली अब भारतीय तटों के साथ-साथ विश्व स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है।

पृथ्वी विज्ञान सचिव के रूप में जिम्मेदारियाँ

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन प्रबंधन, मौसम विज्ञान और समुद्री विज्ञान सहित कई प्रमुख क्षेत्रों की देखरेख करता है। श्रीनिवास कुमार की नियुक्ति का मतलब है कि वे इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए नीति निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। विशेष रूप से, सुनामी, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली को उन्नत करने की अपेक्षा है।

पूर्ववर्ती की विदाई और निरंतरता

श्रीनिवास कुमार ने एम. रविचंद्रन के पद का उत्तराधिकारी बनते हुए, जिन्होंने मई 2026 में लगभग पाँच वर्षों के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्ति ली। रविचंद्रन के कार्यकाल में कई रणनीतिक पहलें शुरू हुईं, जैसे समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए नई नीतियां और सैटेलाइट‑आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली का विस्तार। नई नियुक्ति के साथ, सरकार ने निरंतरता और नवाचार दोनों को सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।

राष्ट्र के लिए व्यापक प्रभाव

श्रीनिवास कुमार की नियुक्ति भारत की समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को वैश्विक मंच पर और भी मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में, भारत समुद्री विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास को तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है, जिससे आर्थिक विकास, जलवायु लचीलापन और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में लाभ होगा।