अंध्र प्रदेश में कई पूर्व माओवादी ने हथियार त्याग कर खेती‑परिवार के माध्यम से नई ज़िन्दगी की शुरुआत की है, पर आर्थिक असहायता और कौशल की कमी उन्हें फिर भी चुनौती देती है। सरकार के पुनर्वास पैकेज और रोजगार पहल इन कठिनाइयों को कम करने की दिशा में काम कर रही हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 118 माओवादी 2024‑2026 में आत्मसमर्पण कर राज्य के पुनर्वास योजना का लाभ उठा रहे हैं।
  • सर्वोच्च स्तर के निरस्त्रीकरण पर तत्काल 2.5 लाख रुपये, मध्यम‑निचले स्तर पर 1.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • रोज़गार की कमी, कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता और सामाजिक कलंक पुनर्संयोजन की मुख्य बाधाएँ हैं।

अंध्र प्रदेश‑तेलंगाना‑छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर पाँच साल तक छिपे रहने वाले कई माओवादी के लिए हथियार डालना केवल पहला कदम है; असली चुनौती है सामान्य जीवन की पुनःस्थापना। इस प्रक्रिया में वे कृषि, छोटे‑व्यवसाय और पारिवारिक समर्थन पर निर्भर हैं, पर आर्थिक असुरक्षा और कौशल की कमी अक्सर उन्हें निराश करती है।

व्यक्तिगत कहानी: इडिमी की नई शुरुआत

मदकाम इडुमा (उपनाम इडिमी) ने 2022 में पाँच साल की छिपी‑छिपी कार्यकाल के बाद आत्मसमर्पण किया। 16 वर्ष की उम्र में सीपीआई (माओवादी) में भर्ती होने के बाद वह चार्ला‑सबारी क्षेत्र समिति की सदस्य और स्थानीय ऑपरेशन स्क्वाड की सदस्य रही, जहाँ वह .303 राइफल चलाती थी। अब वह पोंगुट्टा गाँव में अपने नवजात बेटी सरन्या के साथ एक साधारण जीवन जी रही है, जहाँ स्थानीय बाजार में वह और अन्य आत्मसमर्पित लोग बिना किसी प्रश्न के मिलते‑जुलते हैं।

सरकारी वित्तीय सहायता और उसकी सीमाएँ

अंध्र प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024‑मार्च 2026 के बीच 118 माओवादी ने आत्मसमर्पण किया। राज्य ने अब तक 1.2 करोड़ रुपये का प्रतिपूर्ति प्रदान किया है, और 2027 तक एक अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। 2013 में लागू किए गए संशोधित ‘सर्वसमर्पण‑पुनर्वास योजना’ के तहत उच्च‑स्तरीय cadres को 2.5 लाख रुपये और मध्यम‑निचले स्तर के लिए 1.5 लाख रुपये तत्काल दिया जाता है, साथ ही 3 साल के लिए 4,000 रुपये के मासिक स्टाइपेंड की व्यवस्था है। फिर भी कई निचले‑स्तर के आत्मसमर्पित लोग इन लाभों से अनभिज्ञ रहते हैं, जिससे उनका पुनर्संयोजन अस्थिर रहता है।

रोज़गार की खोज और कौशल प्रशिक्षण की जरूरत

डिर्धा लक्ष्मैया, जो कक्षा IX में स्कूल छोड़कर 2016 में माओवादी में शामिल हुआ, 2019 में आत्मसमर्पण कर अब 25 वर्ष की उम्र में खेती करता है। वह कहता है, “मैं कोई भी कौशल प्रशिक्षण ले कर आजीविका कमाना चाहता हूँ, यहाँ तक कि पर्यटन मार्गदर्शक बनना भी चाहूँगा, अगर सरकार तेलंगाना जैसी योजना लाए।” पुलिस ने निजी कंपनियों के साथ मिलकर नौकरी मेले आयोजित किए हैं और महिलाओं के लिए विशेष कौशल‑प्रशिक्षण एवं स्व‑रोज़गार योजनाओं को तैयार किया है।

भविष्य की दिशा

पुनर्वास के प्रयासों के बावजूद, बुनियादी बुनियादी ढाँचे की कमी, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता और सामाजिक कलंक जैसे मुद्दे पुनर्संयोजन को कठिन बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं; सामाजिक स्वीकृति, निरंतर कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों के साथ जुड़ाव ही स्थायी परिवर्तन की कुंजी है।